आरबीआई की मौदिक समीक्षा बैठक के नतीजे तय करेंगे शेयर बाजार की दिशा

इंडिया न्यूज, Share Market Coming Week : बीते हफ्ते सेंसेक्स में 741.87 अंक यानि कि 1.26 प्रतिशत की गिरावट आई है। सेंसेक्स की शीर्ष 10 में से 7 कंपनियों की मार्केट कैपिटल में सामूहिक रूप से 1,34,139.14 करोड़ रुपए की गिरावट दर्ज की गई है। इससे पहले निवेशकों ने पिछले हफ्ते एक सकारात्मक नोट पर शुरूआत की और 22 सितंबर को भी उल्लेखनीय लाभ कमाया। लेकिन जैसे-जैसे फेड की नीति नजदीक आई, भावनाओं में खटास आई और अत्यधिक अस्थिरता देखी गई।

20 सितंबर से 23 सितंबर तक सेंसेक्स 1,620 अंक से अधिक और निफ्टी 50 लगभग 489 अंक गिरा। वहीं आने वाले सप्ताह में मासिक डेरिवेटिव्स अनुबंधों के निपटान का समय होने की वजह से इस सप्ताह शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। इसके अलावा निवेशकों की निगाह ब्याज दरों पर भारतीय रिजर्व बैंक के निर्णय पर रहेगी।

बाजार विश्लेषकों के मुताबिक रिजर्व बैंक 30 सितंबर को द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा बैठक के नतीजों की घोषणा करेगा। बाजार विश्लेषकों की माने तो वैश्विक बाजारों के रुख से भी यहां धारणा प्रभावित होगी। फेडरल रिजर्व और दुनिया के अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों ने हाल के समय में ब्याज दरों में वृद्धि की है।

रेपो में हो सकती है वृद्धि

RBI

अनुमान लगाया जा रहा है कि वैश्विक केंद्रीय बैंकों से संकेत लेते हुए रिजर्व बैंक भी मौद्रिक नीति समीक्षा में नीतिगत दर रेपो में वृद्धि करेगा। यह लगातार चौथा मौका होगा जबकि केंद्रीय बैंक मुद्रास्फीति पर काबू के लिए नीतिगत दरें बढ़ाएगा।
रिजर्व बैंक ने मई से अब तक रेपो दर में 1.40 प्रतिशत की वृद्धि की है। विश्लेषकों का कहना है कि केंद्रीय बैंक नीतिगत दर में आधा प्रतिशत की और वृद्धि करेगा। इससे रेपो दर बढ़कर 3 साल के उच्चस्तर 5.9 प्रतिशत पर पहुंच जाएगी।

क्या है विशेषज्ञों की राय

इस बारे में जियोजीत फाइनेंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा कि निवेशकों की नजर 30 सितंबर को रिजर्व बैंक की मौद्रिक समीक्षा बैठक के नतीजों पर रहेगी। ऐसा अनुमान है कि बाजार वैश्विक घटनाक्रमों तथा विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) के रुख से दिशा लेगा।

वहीं स्वस्तिका इन्वेस्टमार्ट लिमिटेड के शोध प्रमुख संतोष मीणा ने कहा कि इस सप्ताह भी घरेलू बाजारों पर वैश्विक रुख हावी रहेगा। रिजर्व बैंक की मौद्रिक समीक्षा और सितंबर के वायदा एवं विकल्प निपटान की वजह से हमारे बाजार में उतार-चढ़ाव रहेगा।

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