पाकिस्तानी पत्रकार ने महिला फुटबॉल खिलाड़ियों के शॉर्ट्स पहनने पर उठाया सवाल , टीम के सपोर्ट में उतरे लोग

लड़कियों के कपड़ों पर सवाल अठता ही रहता है। हालांकि समय के साथ लोगों की सोच में बदलाव आया है आज कुछ हद तक लोग इस बात को समझने लगे हैं कि अपने पसंद से कपड़ा पहनना हर इंसान का फंडामेंटल राइट्स है। लेकिन इस बात में भी कोई दो राय नहीं है कि सिर्फ छोटे शहर में ही नहीं बल्कि बड़े शहर में भी लड़कियों के कपड़ों पर कमेंट करते लोग मिल ही जाएंगे। इतना ही नहीं लोग बड़े फिल्म स्टार के कपड़ें पर तंज कसे बिना नहीं रह पाते ऐसे में आम लड़कियों की क्या बात की जाए। लेकिन हद पार तब हो जाती है जब समाज के उस तबके के लोग इस गिरोह में शामिल हो जाते हैं जिनके कंधों पर समाज की सोच सही करने की जिम्मेदारी दी गई होती है। बता दें ऐसा ही वाक्या सामने आया है जिसमें एक पत्रकार महिला खिलाड़ियों के शॉर्ट्स पहनने पर आपत्ति जता रहा है।

ये है पूरा मामला

दरअसल काठमांडू में चल रहे सैफ वूमेन्स चैम्पियनशिप के दौरान उस समय विवाद खड़ा हो गया, जब एक पाकिस्तानी पत्रकार ने अपनी टीम के खिलाड़ियों के शॉर्ट्स पहनने पर आपत्ति जताई। पाकिस्तानी टीम के मालदीव को सात गोल के अंतर से हराने के कुछ देर बाद यह वाकया हुआ। सैफ चैंपियनशिप में पाकिस्तान टीम की आठ साल के लंबे इंतजार के बाद यह पहली जीत थी, लेकिन उस रिपोर्टर ने खेल की बजाय खिलाड़ियों की किट पर ध्यान केंद्रित करना पसंद किया। बता दें मैच के बाद हुए प्रेस कांफ्रेंस में पत्रकार ने पाकिस्तान टीम के मैनेजर और अन्य अधिकारियों से पूछा, ‘जैसा कि आप जानते हैं कि हम इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ पाकिस्तान से ताल्लुक रखते हैं, जो एक इस्लामिक देश है। तो मैं पूछना चाहता हूं कि इन लड़कियों ने शॉर्ट्स क्यों पहन रखी हैं, लेगिंग क्यों नहीं?’

कोच ने दिया मुंहतोड़ जवाब

इस सवाल पर टीम के कोच आदिल रिजकी हैरान रह गए और उन्होंने कहा कि खेलों में हर किसी को प्रगतिशील होना चाहिए। आदिल ने कहा, जहां तक पोशाक का सवाल है तो हमने कभी किसी को रोकने की कोशिश नहीं की। यह कुछ ऐसा है जिसे हम नियंत्रित नहीं करते।’ बता दें पत्रकार के इस तरह के सवाल पूछने से सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई।

टीम के सपोर्ट में उतरे लोग

बता दें लोगों ने खिलाड़ियों की उपलब्धियों के बजाय उनकी कपड़ों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए पत्रकार को कड़ी फटकार लगाई। लेकिन यह वाक्या लोगों के जहन में एक सवाल छोड़ गया कि आखिर जब ऐसे लोग लड़कियों के कपड़ों पर सवाल अठा रहे हैं, जिन्हें कही ना कहीं समाज का सुधारक भी माना जाता है तो आम लोगों का क्या वो तो खुलेयाम ना सिर्फ कमेंट करेंगें बल्कि कुछ ऐसे कदम भी उठा सकते हैं जो इस समाज के लिए और खास करके लड़कियों के आजादी पर सवाल उठा सकता है। ऐसे में आपका इस पूरे मामले पर क्या कहना है हमें जरूर बताएं ।

 

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