कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए 17 अक्टूबर को होगा चुनाव, जाने आखिर क्यों मल्लिकार्जुन खड़गे की जीत है पक्की

कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए 17 अक्टूबर को चुनाव होना है। आज नामांकन के आखिरी दिन शशि थरूर और मल्लिकार्जुन खड़गे ने पर्चा भरा। इन दोनों नेताओं के अलावा झारखंड के कांग्रेस नेता केएन त्रिपाठी ने भी पर्चा भरा। वहीं अध्यक्ष पद की दौड़ से दिग्विजय सिंह ने खुद को बाहर कर लिया है भले ही खड़गे के चुनाव लड़ने से ये बात साफ हो चुकी है कि वो गांधी परिवार की च्वॉइस है। लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए तीन उम्मीदवार होने के चलते अब मुकाबला त्रिकोणीय होता नज़र आ रहा है।

खड़गे को लेकर क्या बोले दिग्विजय सिंह

कांग्रेस अध्यक्ष पद की रेस से खुद को बाहर करने के बाद दिग्विजय सिंह ने कहा, खड़गे जी मेरे सीनियर हैं। मैं कल उनके आवास पर गया था और कहा कि अगर वह कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए नामांकन कर रहे हैं तो मैं नहीं करूंगा। तब उन्होंने कहा कि वो नामांकन नहीं कर रहे हैं। इसके बाद मुझे मीडिया से मालूम चला कि वह इस पद के उम्मीदवार हैं। मैंने उनसे कहा कि मैं उनके साथ खड़ा हूं और उनके खिलाफ चुनाव लड़ने की सोच भी नहीं सकता। मैं उनका प्रस्तावक बनूंगा।

क्या बोले अशोक गहलोत

वहीं अशोक गहलोत ने कहा कि हमारे वरिष्ठ नेताओं ने मल्लिकार्जुन खड़गे को लेकर एक फैसला लिया है। मैं उनका प्रस्तावक बनूंगा। गहलोत ने यह भी कहा कि वह राजस्थान के मुख्यमंत्री रहने समेत सभी मामलों पर पार्टी के आदेशों का पालन करेंगे। गौरतलब है राजस्थान में सियासी उठापटक के बाद राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अध्यक्ष पद की रेस से खुद को बाहर कर चुके हैं। कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद गहलोत ने चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया था। इतना ही नहीं गहलोत के सीएम पद पर बने रहने को लेकर भी सस्पेंस गहराया हुआ है। हालांकि कि पार्टी की तरफ से बताया गया है कि एक या दो दिन में इस पर फैसला हो जाएगा।

मल्लिकार्जुन खड़गे को लेकर शशि थरूर ने क्या कहा

शशि थरूर ने वरिष्ठ नेताओं द्वारा मल्लिकार्जुन खड़गे का समर्थन करने को लेकर कहा कि कांग्रेस नेतृत्व से पूछना चाहिए कि ऐसा क्यों दिखाया जा रहा है कि मल्लिकार्जुन खड़गे आधिकारिक उम्मीदवार हैं। शशि थरूर ने कहा कि मुझे पार्टी नेतृत्व की ओर से बताया गया था कि कोई भी आधिकारिक उम्मीदवार नहीं होगा। उन्होंने कहा कि आप नामांकन देखेंगे, तो इससे पता चलता है है कि खड़गे कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की फौज के साथ नामांकन करने गए। जबकि मैं सामान्य कार्यकर्ताओं के साथ। थरूर ने कहा कि जो स्थिति को बरकरार रखना चाहते हैं, वे खड़गे को वोट करेंगे, जो बदलाव चाहते हैं, वे मुझे वोट करेंगे।

आखिर क्यों खड़गे की जीत है पक्की

  • खड़गे कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष रह चुके हैं। वो 8 बार विधायक और 2 बार लोकसभा सांसद रहे हैं। अभी राज्यसभा के सदस्य हैं। अपने राजनीतिक जीवन में वो सिर्फ एक बार चुनाव हारे हैं और वो भी 2019 का लोकसभा चुनाव। खड़गे का लगातार 10 चुनाव जीतने का ट्रैक रिकॉर्ड है। 8 बार विधानसभा और 2 बार लोकसभा।
  • दोनों यूपीए सरकार में खड़गे की अहम भूमिका रही है। संगठन में भी उनकी भूमिका काफी अहम है। कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के रहने के अलावा वो वहां के गृह मंत्री और ग्रामीण विकास मंत्री भी रह चुके हैं।
    यूपीए-2 में मई 2009 से जून 2014 तक खड़गे श्रम और रोजगार मंत्री रहे हैं।जून 2013 से मई 2014 तक उन्होंने रेल मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली। 2014 में पार्टी के हार के बाद वो लोकसभा में कांग्रेस के नेता रहे और अभी राज्यसभा में विपक्ष के नेता हैं।
  • इन सब से परे साफ छवि वाले मल्लिकार्जुन खड़गे कांग्रेस के कद्दावर नेता हैं। वह गांधी परिवार के करीबी भी हैं। दलित समाज से आने वाले खड़गे के विपक्षी नेताओं से भी अच्छे संबंध हैं। विधायकों की बगावत के बाद वह पर्यवेक्षक बनकर राजस्थान गए थे। हालांकि एक सवाल यह भी उठ रहा है कि अगर खड़गे कांग्रेस अध्यक्ष बनते हैं तो क्या वह राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद छोड़ेंगे क्योंकि कांग्रेस में एक व्यक्ति-एक पद का सिद्धांत है। इससे पहले सीएम अशोक गहलोत को भी मुख्यमंत्री पद छोड़ने के लिए कहा गया था

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