कुड़मी जाति का आंदोलन 120 घंटे बाद समाप्त, रेलवे को 500 करोड़ का नुकसान

इंडिया न्यूज़ (कोलकाता, railway face 500 crore loss due to kurmi protest): कुड़मी समाज को एसटी सूची में शामिल करने को लेकर हो रहा आंदोलन अब समाप्त हो गया है। यह आंदोलन कुल पांच दिन तक चला। इस दौरान रेलवे ट्रैक और हाईवे जाम किया गया.

कुड़मी टोटनिक नाम के संगठन के बैनर तले यह आंदोलन हो रहा था। बुधवार को इस मामले को लेकर आंदोलनकारियों की बातचीत पश्चिम बंगाल सरकार से होगी। आंदोलनकारियों ने सरकार को दुर्गा पूजा तक का समय दिया है। अगर तब तक कोई कार्रवाई नही हुई तो फिर से आंदोलन होगा.

500 करोड़ का हुआ नुकसान

इस आंदोलन की वजह से 500 करोड़ का नुकसान हुआ है। इससे रेलवे को करीब 600 ट्रेनों को रद्द करना पड़ा और करीब 105 ट्रेनों को मार्ग बदल कर चलाना पड़ा। जिन ट्रेनों को रद्द किया गया उनमें 295 मेल-एक्सप्रेस ट्रेने थी, 90 ट्रेनों को कम दूरी तक चलाया गया। वही 150 मालगाड़ियों को भी इस दौरान नही चलाया जा सका.

इस आंदोलन की वजह से सबसे ज्यादा रेलवे के खड़कपुर मंडल -आद्रा मंडल-रांची मंडल और चक्रधरपुर मंडल प्रभावित रहे। चक्रधपुर से बड़ी संख्या में मालगाड़ियों का परिचालन नही हो सका। रविवार सुबह से आवागमन सामान्य हो सका। 21 तारीख से यह आंदोलन चल रहा था जिस कारण रेलवे यात्रियों को मुश्किलो का सामना करना पड़ रहा था.

भारत सरकार ने राज्यों को दी थी मंजूरी

भारत के पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने 18 अगस्त, 2021 को संविधान (105वां संशोधन) अधिनियम, 2021 को मंजूरी दी, जो राज्यों को सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्ग (SEBC) की पहचान करने और उल्लिखित करने का अधिकार देता है। संविधान (105वां) विधेयक 2021 को संसद ने 11 अगस्त, 2021 को पारित किया था.

भारत का राजपत्र जो कानून और न्याय मंत्रालय द्वारा जारी किया जाता है उसके अनुसार, अधिनियम संविधान के अनुच्छेद 338B को खंड (9) में संशोधित करेगा, और एक प्रावधान सम्मिलित करेगा: “बशर्ते कि इस खंड में कुछ भी अनुच्छेद 342क के खंड (3) के प्रयोजनों के लिए लागू नहीं होगा”

संविधान के अनुच्छेद 342ए के अनुसार “केंद्रीय सूची में सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्ग जो केंद्र सरकार के प्रयोजनों के लिए होंगे” को प्रतिस्थापित किया जाएगा, और यह “केंद्रीय सूची” का अर्थ सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों की सूची है। केंद्र सरकार द्वारा इसे तैयार और अनुरक्षित किया जाना चाहिए.

नए अधिनियम के अनुसार, प्रत्येक राज्य या केंद्र शासित प्रदेश, कानून द्वारा, अपने उद्देश्यों के लिए, सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों की एक सूची तैयार कर सकता है, जिसकी सूचि केंद्रीय सूची से भिन्न हो सकती हैं.

“संविधान के अनुच्छेद 366 में, खंड (26ग) के स्थान पर, निम्नलिखित खंड प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात्: – ‘(26ग)’ इसके अनुसार “सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्ग” का अर्थ है ऐसे पिछड़े वर्ग जिन्हें अनुच्छेद 342ए के तहत केंद्र सरकार या राज्य या केंद्र शासित प्रदेश द्वारा (जैसा भी मामला हो) समझा गया हो.

Latest news
Related news