गुलाम मानसिकता से आजादी पाना बेहद जरूरी : सांसद कार्तिक शर्मा

इंडिया न्यूज़, गुरुग्राम | MP Kartik Sharma : राज्यसभा सांसद कार्तिक शर्मा शुक्रवार को गुरुग्राम के सिविल लाइन स्थित युद्ध स्मारक पर आयोजित अभिनंदन समारोह में सम्मिलित हुए। इस दौरान प्रदेश भाजपा महिला मोर्चा, गुरुग्राम जिला बार एसोसिएशन और रोटरी क्लब द्वारा सांसद कार्तिक शर्मा का स्वागत किया गया। गुरुग्राम के सिविल लाइन स्थित युद्ध स्मारक पहुंचे सांसद कार्तिक शर्मा ने शहीदी दिवस के अवसर पर युद्ध स्मारक पर पुष्प अर्पित किए।

अभिनंदन समारोह में तमाम लोगों से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि नौकरियों में पारदर्शिता के जिस मुद्दे को लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्री पंडित विनोद शर्मा लोगों की आवाज उठाते रहे हैं मुझे खुशी है यह कहने में कि मुख्यमंत्री हरियाणा मनोहर लाल ने भी इसी लाइन ट्रांसपेरेंसी को लेकर बहुत अच्छा काम किया है। प्रदेश की सरकार ने बहुत अच्छा काम किया है। यहां पर इंटरव्यू सिस्टम खत्म किया और साथ में सरकारी नौकरियों के पर ट्रांसफर पोस्टिंग का जो पारदर्शिता का काम किया है। यह गुड गवर्नेंस का एक अच्छा मॉडल साबित हुआ है।

संविधान ने हमें अभिव्यक्ति की आजादी दी, सरकार ने हमारी आजादी को नया रास्ता दिखाया : शर्मा

सांसद कार्तिक शर्मा (MP Kartik Sharma) ने कहा कि हमें इस बात का अहसास होना चाहिए कि हमने पिछले 75 साल में क्या पाया और आने वाले 25 साल में हम क्या पाना चाहते हैं। हमने आजादी तो पाई पिछले 75 साल में लेकिन गुलामी की मानसिकता से आजादी नहीं पाई।

अभिव्यक्ति की आजादी तो हमारे संविधान ने हमें दी लेकिन अपनी पहचान की आजादी हमें नहीं मिली। इसका एक उदाहरण है कि पिछले साल जब नोटरी एक्ट को खत्म किया गया जो कि हमारे को अपनी आईडेंटिटी प्रूफ करने को बोलना था यानि कि उसके तहत आप कौन हैं या क्या हैं यह तभी प्रमाणित होगा जब कोई गैजेटेड अफसर प्रमाण पत्र पर साइन करके करें। यह आपको इस बात का प्रमाण दें कि आप वही व्यक्ति विशेष है।

आजादी के 75 साल बाद भी ऐसे कानूनों को खत्म करने का काम किया। इसके लिए भी सरकार बधाई की पात्र है। उनका धन्यवाद करता हूं आज पहली बार है जब 75 साल के इतिहास के अंदर हमारे देश का नेतृत्व चाहे वह हमारे महामहिम राष्ट्रपति हो, चाहे वह हमारे माननीय प्रधानमंत्री हो या उपराष्ट्रपति हो, चाहे वह हमारे लोकसभा के स्पीकर हो या फिर हमारे मुख्यमंत्री मुझे खुशी है कि जब हम आजादी की सोच की बात करते हैं।

पहली बार भारत में ऐसा हुआ है कि हमारे देश का शीर्ष नेतृत्व आजाद भारत में पैदा हुआ है और जो शीर्ष नेतृत्व कर रहे हैं, जो भी अपने बच्चों को देना चाहते हैं युवा पीढ़ी को देना चाहते हैं इसको लेकर वह आगे जाएंगे इसको लेकर हमारे देश का भविष्य बनाएंगे। इसलिए मैं समझता हूं कि हमारे को गुलामी की मानसिकता को तोड़ना है। गुलामी की मानसिकता का प्रतीक है उनको तोड़ना जरूरी है, क्योंकि हमारे बच्चे आजाद देश में पैदा हुए हैं और आजाद देश की का सुनहरा भविष्य देखने जा रहे हैं।

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