आईएसआई के एक कर्नल ने हमें एलओसी पर हमले के लिए भेजा था : तबारक हुसैन

  • नौशेरा सेक्टर से जिंदा पकड़े आतंकी ने खोले और भी कई राज

इंडिया न्यूज, श्रीनगर, (Fidayeen Attacker Tabarak Hussain): सुरक्षा बलों के हत्थे चढ़े एक आतंकी ने पाकिस्तानी सेना व वहा की खुफिया एजेंसी की भारत के खिलाफ साजिश को लेकर कई बड़े खुलासे किए हैं। नौशेरा सेक्टर से दबोचे गए आतंकी तबारक हुसैन का कहना है कि आईएसआई में कर्नल रैंक के अधिकारी यूसुफ चौधरी ने हमले के लिए फिदायीन दस्ता एलओसी पर भेजा था। सेना की अग्रिम चौकियां आतंकियों के निशाने पर थीं। सुरक्षा बलों के साथ ही पत्रकारों के सवालों के जवाब में भी उसने ये राज उगले हैं।

हमले के लिए दिए गए थे 30 हजार रुपए

राजौरी के सैन्य अस्पताल में भर्ती तबारक हुसैन ने बताया है कि उसे हमले के लिए 30 हजार रुपए दिए गए थे। सीमा पर जब तबारक हुसैन भारतीय सुरक्षा बलों के हत्थे चढ़ा, उस समय उसके साथ वहां पर दो और आतंकी भी मौजूद थे। तारबंदी काटने के दौरान सुरक्षा बलों ने तबारक पर गोलीबारी कर घायल कर दिया। इस बीच अन्य आतंकी मौके से भाग गए और तबारक नहीं भाग सका।

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जानिए किस तरह पकड़ में आया तबारक हुसैन

रक्षा प्रवक्ता ने बताया कि सुरक्षा बलों ने गत 21 अगस्त की अलसुबह नौशेरा के झंगड़ इलाके में तीन आतंकियों की हलचल देखी। इस दौरान तबारक हुसैन तारबंदी के पास पहुंचकर तार काटने लगा, जबकि दो अन्य दहशतगर्द पीछे रहे। जवानों ने तबारक को चुनौती देते हुए कहा कि सरेंडर कर दो नहीं तो गोली मार दी जाएगी। यह सुनकर वह मौके से भागने लगा। जवानों ने फायरिंग कर दी जिसमें जिसमें तबारक को चार गोलियां लगी और वह गंभीर रूप से घायल होकर वहीं गिर गया और अन्य आतंकी भाग निकले।

दहशतगर्द 3 चौकियों की कर चुके थे रेकी

तबारक हुसैन ने खुद बताया है कि कर्नल यूसुफ से उसे हमले के लिए 30 हजार रुपए दिए थे। तबारक ने यह भी बताया कि भारतीय सेना की तीन चौकियों रेकी की गई थी और मौका मिलते ही हमला किया जाना था। तबारक का कहना है कि हमले को अंजाम देने के लिए तीन नहीं बल्कि कुल पांच आतंकी एलओसी पर पहुंचे थे। तबारक को उसके भाई हारून अली के साथ 2016 में भी पकड़ा गया था। कुछ वर्ष जेल में रखने के बाद उसे पाकिस्तान को लौटा दिया था।

सेना के जवानों ने खून डोनेट व खाना खिलाकर बचाया

सैन्य अधिकारी का कहना है कि तबारक के शरीर से काफी खून बह गया था। उसके शरीर से चार गोलियां निकाल ली गई हैं। अधिकारी ने बताया कि आतंकी को बचाने के लिए सेना के जवान ने अपना खून दिया है। तबारक की सर्जरी भी की गई है। सैन्य अस्पताल के कमांडेंट ब्रिगेडियर राजीव नायर ने बताया कि तबारक हुसैन की हालत स्थिर है। जवानों ने उसे खून देकर व अपने हाथों से खाना खिलाकर बचाया है।

मैं यहां मरने आया था, मेरे साथ धोखा हुआ : आतंकी

कमांडेंट ब्रिगेडियर राजीव नायर ने बताया, सेना की गोलीबारी में घायल होने के बाद गिरफ्तारी के समय तबारक बिलख कर रोते हुए बोल रहा था, मैं यहां मरने आया था, मेरे साथ धोखा हुआ। साथी मुझे छोड़कर भाग गए और मैं भारतीय सेना के हाथों पकड़ा गया। नायर ने बताया कि उसकी बाजु व टांग के नीचे और प्राइवेट पार्ट के बाल मुंडाए गए थे। बता दें कि हमले से पहले फिदायीन आतंकी ऐसा करते हैं।

आतंकी के छह भाई, पूरे परिवार में 15 लोग

तबारक के छह भाई हैं और उसके पूरे परिवार में 15 लोग हैं। पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर के सब्जकोट गांव और कोटली जिले का निवासी है। वह लंबे समय से आतंकवाद से जुड़ा था और उसे पाक सेना के मेजर रजाक ने ट्रेनिंग दी थी। उसने लश्कर-ए-तैएबा व जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों के साथ भी छह माह की ट्रेनिंग ली है। आतंकी ने बताया कि पाक आर्मी आतंकियों की ट्रेनिंग के लिए कई कैंप चला रही है।

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