लॉन्ग जंप में मुरली श्रीशंकर ने रचा इतिहास, सिल्वर मेडल किया अपने नाम

वैभव शुक्ला, नई दिल्ली, (CWG 2022):

बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 (CWG 2022) में सातवें दिन एथलेटिक्स में भारत के मुरली श्रीशंकर ने लंबी कूद में इतिहास अपने नाम कर लिया है। भारत के नंबर वन जंपर श्रीशंकर ने पुरुषों की लंबी कूद में कॉमवेल्थ गेम्स के इतिहास में भारत के लिए पहला सिल्वर मेडल जीत लिया है। फाइनल मुकाबले में श्रीशंकर ने कुल 8.08 मीटर की छलांग लगाते हुए सिल्वर अपने नाम किया। भारत ने एथलेटिक्स में दूसरा और राष्ट्रमंडल खेलों का 19वां मेडल हासिल किया।

फ़ाइनल में किया शानदार प्रदर्शन

श्रीशंकर ने क्वालिफिकेशन राउंड में 8.05 मीटर की छलांग लगाई और सीधे एक ही प्रयास में फाइनल के लिए क्वालिफाई किया था। गुरुवार 4 अगस्त की रात लॉन्ग जंप के फाइनल में श्रीशंकर ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सिल्वर हासिल किया। वहीं, भारत के ही मोहम्मद अनीस याहिया ने 7.97 मीटर की बेस्ट जंप के साथ पांचवां स्थान हासिल किया।

श्रीशंकर भारतीय जंपर सुरेश बाबू के बाद कॉमनवेल्थ गेम्स में लॉन्ग जंप का मेडल जीतने वाले दूसरे भारतीय पुरुष, जबकि सिल्वर मेडल जीतने वाले पहले पुरुष बन गए हैं। सुरेश बाबू ने साल 1978 के कॉमनवेल्थ गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल जीता था।

पांचवी छलांग में मेडल पक्का किया

श्रीशंकर की शुरुआत फाइनल मुकाबले में थोड़ी धीमी रही और उन्होंने पहले प्रयास में 7.60 मीटर की जंप लगाई। दूसरे प्रयास में सुधार करते हुए 7.84 मीटर की छलांग लगाई। तीसरा प्रयास में भी उन्होंने 7.84 मीटर का ही स्कोर किया। चौथे प्रयास में मुरली ने 8 मीटर का दायरा तो पार कर लिया था।

लेकिन सिर्फ 1 मिलीमीटर के अंतर से उसे फाउल करार दिया गया। इसके बाद पांचवें प्रयास में श्रीशंकर ने 8.08 मीटर की जबरदस्त छलांग के साथ खुद के लिए सिल्वर पक्का किया। उन्होंने बहामास के लेकुआन नेर्न की बराबरी की। लेकुआन ने अपनी दूसरी कोशिश में 8.08 मीटर का ही सर्वश्रेष्ठ दूरी तय कर ली थी।

इसके बाद भी श्रीशंकर दूसरे स्थान पर कायम रहे। अपने आखिरी प्रयास में दोनों खिलाड़ी अपने आखिरी प्रयास में इसे बेहतर करने में नाकाम रहे और मुकाबला 8.08 से बराबर रहा। लेकुआन ने गोल्ड जीता और श्रीशंकर के हाथों सिल्वर लगा।

इस नियम के कारण सोने से चूके श्रीशंकर

अगर दो खिलाड़ी बराबरी की स्थिति पर होते हैं। तब यह देखा जाता है कि किस जंपर का दूसरा सर्वश्रेष्ठ प्रयास ज्यादा बेहतर रहा। इस मुकाबले में लेकुआन के एथलीट ने बाजी मरी। लेकुआन का दूसरा सर्वश्रेष्ठ प्रयास 7.98 मीटर का था और श्रीशंकर का 7.84 मीटर। इस नियम की वजह से लेकुआन को विजेता घोषित कर दिया गया।

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