बिहार में वायरल बुखार से 25 से ज्यादा बच्चों की मौत, सैकड़ों उपचाराधीन

इंडिया न्यूज, पटना।

VIRAL FEVER : बिहार में अब वायरल बुखार का कहर है। बच्चों पर इसका ज्यादा असर है। एक महीने में चपेट में आकर 25 से ज्यादा बच्चों की वायरल बुखार के कारण मौत हो चुकी है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हो या जिल अस्पताल, वायरल बुखार के मरीजों में अधिकतर बच्चे हैं। कई बच्चों की हालत गंभीर है। राजधानी पटना के सभी बड़े अस्पतालों में पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीकू) व नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट (नीकू) में बेड फुल हो चुके हैं। उत्तर बिहार के जिले खासकर मुजफ्फरपुर, पूर्वी व पश्चिमी चंपारण, गोपालगंज, सीवान, मधुबनी, दरभंगा, समस्तीपुर, सीतामढ़ी व सारण के अलावा गया, भागलपुर व खगड़िया में स्थिति ज्यादा खराब है। जानकारी के अनुसार मुजफ्फरपुर के श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज अस्पताल (एसकेएमसीएच) तथा केजरीवाल अस्पताल में पिछले एक पखवाड़े में 2500 से अधिक बच्चे इलाज के लिए पहुंचे। दोनों अस्पतालों में 200 से ज्यादा बच्चे भर्ती हैं और करीब 100 रोज यहां पहुंच रहे हैं। मुजफ्फरपुर के सदर अस्पताल में औसतन करीब 800 में से लगभग 300 मरीज वायरल बुखार के हैं। दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल (डीएमसीएच) में इसी अवधि में लगभग 2,300 बच्चों का इलाज किया गया जबकि 15 बच्चों की वायरल बुखार से मौत हो गई। यहां करीब सवा सौ से अधिक बच्चे रोज आ रहे हैं।

कोरोना की तीसरी लहर से इनकार

एसकेएमसीएच के शिशु रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. गोपाल शंकर साहनी ने भी कोरोना की तीसरी लहर से साफ इनकार करते हुए कहा, यह वायरल बुखार है, जिसके अलग-अलग रूप होते हैं। जलजमाव व गर्मी इसकी मुख्य वजह है। सिविल सर्जन डॉ. के. के. राय के अनुसार, ह्यह्यजिले के विभिन्न प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी निमोनिया पीड़ित बच्चों के आने की संख्या तेजी से बढ़ी है। करीब एक से तीन वर्ष के बच्चे ज्यादा पीड़ित हैं।

मामले पर स्वास्थ्य विभाग की नजर

राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक संजय कुमार सिंह ने कहा है कि बच्चों को सामान्य से अधिक आ रहे बुखार पर विभाग की नजर है। इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम (आईडीएसपी) के स्टेट प्रोग्राम आॅफिसर डॉ. रंजीत कुमार के अनुसार, पहली नजर में आरएस वायरस से ही बच्चों के बीमार होने की बात सामने आ रही है। मुजफ्फरपुर के एसकेएमसीएच पहुंची टीम किसी खास निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी। हालांकि, निपाह वायरस के कारण बीमारी की आशंका पर जांच का निर्णय लिया गया।

 

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