26 जनवरी में इस बार कौन होगा विदेशी मुख्य मेहमान, 6 महीने में होता है मेहमान का चुनाव

(इंडिया न्यूज़): 2023 में देश अपना 74वां गणतंत्र दिवस मनाएगा। इस बार के चीफ गेस्ट होंगे मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतेह अल-सिसी। कोविड-19 की वजह से दो साल बाद कोई चीफ गेस्ट इस समारोह की शोभा बढ़ाएगा। भारत में रिपब्लिक डे पर विदेशी चीफ गेस्ट की पुरानी परंपरा रही है। दो बार पाकिस्तान के नेता भी परेड के मुख्य अतिथि बन चुके हैं। जनवरी 1965 में पाक के एग्रीकल्चर मिनिस्टर राणा अब्दुल हामिद हमारे मेहमान थे और 3 महीने बाद अप्रैल में पाकिस्तान के साथ जंग छिड़ गई थी।

74 साल के इतिहास में ये पहली बार होगा जब मिस्र का कोई लीडर भारतीय गणतंत्र दिवस समारोह में चीफ गेस्ट बनेगा। ये भारतीय विदेश कूटनीति के लिहाज से एक बड़ा कदम है। दरअसल, भारत अरब और दक्षिण में अपनी पहुंच बढ़ाना चाहता है। इसके लिए अरब देशों में सबसे ज्यादा आबादी वाला और दक्षिण में दूसरा सबसे बड़ा इकोनॉमी वाला मिस्र भारत के नजरिए से सबसे बेहतर है। इस साल दोनों देशों ने अपने डिप्लोमैटिक रिलेशनशिप की 75वीं एनिवर्सरी भी सेलिब्रेट की है। सितंबर में डिफेंस मिनिस्टर राजनाथ सिंह के मिस्र दौरे के वक्त दोनों देशों ने जाइंट ट्रेनिंग, डिफेंस को-प्रोडक्शन और हथियारों के मेंटेनेंस के लिए एक MoU पर भी साइन किया था। मिस्र ने भारत में बने तेजस फाइटर जेट खरीदने में भी दिलचस्पी दिखाई है। भारत को मिस्र ने 12वें डिफेंस एक्सपो में भी इनवाइट किया था। मिस्र उन 9 देशों में भी शामिल है जिन्हें भारत ने अगले साल नई दिल्ली में होने वाले G-20 समिट के लिए बुलाया है।

रूस-यूक्रेन जंग के बीच भारत मिस्र को गेहूं भी एक्सपोर्ट करता रहा है। इसके अलावा मिस्त्र भारत के सबसे पुराने ट्रेडिंग पार्टनर्स में से भी एक है। दोनों देशों के बीच साल 2020-21 में करीब 33 हजार करोड़ का ट्रेड हुआ। गणतंत्र दिवस पर चीफ गेस्ट चुनने की प्रक्रिया रिपब्लिक डे से छह महीने पहले शुरू की जाती है। विदेश मंत्रालय के बड़े अधिकारी अलग-अलग नामों पर चर्चा करते हैं। इस दौरान कई पहलुओं को ध्यान में रखा जाता है। मसलन- जिस देश का चीफ गेस्ट होगा उससे भारत के रिश्ते कैसे हैं। इसके बाद पॉलिटिकल, इकोनॉमिक, कॉमर्शियल, सैन्य सहयोग और अन्य विषयों पर चर्चा होती है। जब किसी एक देश को लेकर मीटिंग में शामिल सभी विशेषज्ञ सहमत हो जाते हैं तो उस देश का नाम प्रधानमंत्री को भेजा जाता है। PM अपने सलाह-कारों के साथ राय-मशवरा करने के बाद फाइल आगे राष्ट्रपति भवन में बढ़ा देते हैं। राष्ट्रपति भवन से ग्रीन सिग्नल मिलने के बाद तय मेहमान का शेड्यूल पूरी सावधानी के साथ उस देश में अपाइंट इंडियन ऐंबैस्डर पता करते हैं। सब सही होने पर विदेश मंत्रालय का टेरीटोरियल डिविजन तय हुए चीफ गेस्ट के साथ बातचीत शुरू करता है। दूसरी ओर से सहमति मिलने के बाद चीफ गेस्ट के नाम पर फाइनल मुहर लगती है।

इसके बाद प्रोटोकाल अधिकारी मिनट टु मिनट शेड्यूल प्रोग्राम पूरी सिक्योरिटी के साथ जिम्मेदार ऑफिसर्स के साथ शेयर करते हैं। रिपब्लिक डे आयोजन की शुरुआत 26 जनवरी 1950 को हुई थी। पहला समारोह इरविन स्टेडियम में मनाया गया। इसमें इंडोनेशिया के पहले राष्ट्रपति डॉ. सुकर्णो को चीफ गेस्ट बनाया गया। नेहरू और सुकर्णो बेहद करीबी माने जाते थे। दोनों ने एशिया और अफ्रीकी देशों की आजादी को लेकर आवाज उठाई थी। 1955 में राजपथ पर पहली बार गणतंत्र दिवस परेड हुई। इस समारोह में पाकिस्तान के गवर्नर जनरल मलिक गुलाम मोहम्मद बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। इसके दस साल बाद 1965 में पाकिस्तान के एग्रीकल्चर मिनिस्टर राणा अब्दुल हमीद शामिल हुए। इसके तीन महीने बाद ही दोनों देशों के बीच जंग छिड़ गई। तब से आज तक पाकिस्तान के किसी नेता को रिपब्लिक डे परेड का चीफ गेस्ट नहीं बनाया गया। रिपब्लिक डे परेड में सबसे ज्यादा 5 बार फ्रांस और ब्रिटेन के लीडर शामिल हुए हैं। भूटान के राजा 4 बार परेड में चीफ गेस्ट रहे। 1958 में चीनी आर्मी के मार्शल ये जियानयिंग भी रिपब्लिक डे परेड में आ चुके हैं। अब तक कुल 77 विदेशी मेहमानों ने रिपब्लिक डे की शोभा बढ़ाई है।

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