Russia Ukraine War Continues For 36th Day : जानिए, क्यों रूस चाहता है यूक्रेन को दो हिस्सों में बांटना?

इंडिया न्यूज, नई दिल्ली:
Russia Ukraine War Continues For 36th Day:
रूस और यूक्रेन (Ukraine) का युद्ध आज 36वें दिन भी जारी है। वहीं रूस अब यूक्रेन को दो भागों में बांटने की तैयारी कर रहा है। इस मामले मे यूक्रेन मिलिट्री के इंटेलिजेंस चीफ किरिलो बुदानोव का कहना है कि रूस उनके देश की हालत कोरिया की तरह करने की सोच रहा है। तो आइए जानते हैं आखिर दो हिस्सों में क्यों बंटा था कोरिया। क्या यूक्रेन भी बंट सकता है दो भागों में। रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म करवाने में भारत की क्या हो सकती है भूमिका।

आपको बता दें 24 फरवरी 2022 को रूस और यूके्रन का युद्ध शुरू हुआ था लेकिन 33 दिन बाद भी रूसी सेना भले ही कीव पर चढ़ाई नहीं कर पाई हो, लेकिन 25 मार्च के बाद रूस (Vladimir Putin) ने राजधानी कीव से अपना ध्यान हटाकर अचानक पूर्वी यूक्रेन की दनिपर नदी के किनारे वाले शहरों की ओर कर दिया है। इससे साफ होता जा रहा है कि रूस यूक्रेन को दो हिस्सों में बांटना चाहता है। (Russia Ukraine war update)

क्या रूस यूक्रेन को बांट देगा दो टुकड़ों में?

कहते हैं कि पूर्वी यूक्रेन की दनिपर नदी के किनारे वाले क्षेत्र में रूसी भाषा बोलने वाले लोगों की संख्या काफी है। यह क्षेत्र रूसी सीमा से लगा हुआ है और सुरक्षा के ख्याल से रूस के लिए अहम है। ब्लैक-सी समेत प्रमुख व्यवसायिक केंद्र इस हिस्से में हैं, ऐसे में रूस इस हिस्से में अपना दबदबा चाहता है। यही वजह है कि इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि जैसे दुनिया के ताकतवर देशों के राजनीतिक पेंच में फंसकर कोरिया दो हिस्सों में बंटा, उसी तरह रूस सैन्य ताकत से अब यूक्रेन को भी दो हिस्सों में बांट सकता है।

जल्द हो सकती है पुतिन और जेलेंस्की की मुलाकात

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रूस के रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगू ने कहा, यूक्रेन में पहले फेज की मिलिट्री कार्रवाई खत्म हो गई है। अब उनका फोकस पूर्वी यूक्रेन के कुछ हिस्सों को आजाद कराने पर रहेगा। इसके अलावा, रूस के प्रमुख वातार्कार मेंडिस्की ने कहा है कि बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ रही है। जल्द पुतिन और जेलेंस्की के बीच मुलाकात हो सकती है। इस मुलाकात के दौरान दोनों देश सीजफायर के लिए तैयार हो सकते हैं। इसके साथ ही दोनों देश के बीच इन बातों पर सहमति भी बन सकती है।

इन बातों पर बन सकती है सहमति  (Russia Ukraine War Continues For 36th Day)

यूक्रेन पूरी तरह से क्रीमिया को रूस का हिस्सा मानने के लिए तैयार हो सकता है। यूक्रेन देश के अंदर ही डोनेट्स्क और लुहांस्क समेत रूसी भाषा बोलने वालों की ज्यादा जनसंख्या वाले शहरों को विशेष राज्य का दर्जा दे सकता है। इसके साथ ही यूक्रेन नाटो में शामिल नहीं होने का रूस से लिखित वादा कर सकता है।

रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म कराने के लिए भारत क्या कर सकता?

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  • आपको बता दें कि यूक्रेन में युद्ध खत्म कराने को लेकर भारत पहले से ही कोशिशें कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले एक महीने में पुतिन और जेलेंस्की के साथ फोन पर दो बार लंबी बातचीत की है। वहीं कहा जा रहा है कि रूस से भारत के रिश्ते अच्छे हैं। इसी तरह यूक्रेन के पीछे खड़े अमेरिका से भी भारत की नजदीकियां हैं। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में रूस और अमेरिका दोनों को ही भारत की जरूरत है, इसलिए विवाद सुलझाने में भारत की भूमिका अहम हो सकती है।
  • क्वाड में भारत की हिस्सेदारी को लेकर अमेरिका उत्सुक है। वहीं, ब्रिक्स में पुतिन की चाहत है कि वह मोदी और शी जिनपिंग के साथ खड़े होकर पूरी दुनिया को रूस, चीन और भारत की एकजुटता दिखाएं। इजराइल का सबसे नजदीकी दोस्त अमेरिका है। दूसरी ओर, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की यहूदी हैं, जो इजराइल के लिए अहम हैं। नफ्ताली बेनेट इसलिए पहले से ही मध्यस्थता की पहल कर रहे हैं।

कोरिया युद्ध का क्या था कारण? (Russia Ukraine War Continues For 36th Day)

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  • 1904 से पहले एक टापू पर कोरियाई साम्राज्य का शासन था, इसलिए लोग इसे कोरिया के नाम से जानते थे। कोरिया प्रायद्वीप पर कब्जे के लिए 1894-95 और 1904-05 में जापान और चीन के बीच भयानक युद्ध हुए। इस युद्ध के बाद कोरिया पर एक तरह से जापान का एकाधिकार हो गया था।
  • 1945 में सेकेंड वर्ल्ड वॉर खत्म होने के बाद कोरिया को दुनिया के दो ताकतवर देशों ने वहां के लोगों से पूछे बगैर आपस में बांट लिया। एक हिस्सा सोवियत संघ और दूसरा अमेरिका के हिस्से में चला गया। संयुक्त राष्ट्र संघ के नेतृत्व में 1948 में साउथ में हुए चुनाव में नॉर्थ कोरिया ने भाग लेने से इनकार कर दिया। जिसके परिणामस्वरूप दो कब्जे वाले क्षेत्रों में अलग कोरियाई सरकारों का गठन हुआ।

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किस सन् में कोरिया दो भागों में बंटा था?

  • बता दें कि वह दौर अलग था और यह दौर अलग है। विचारधारा की लड़ाई में 1950 में कोरिया दो हिस्सों में बंटा था। एक पर अमेरिका जबकि दूसरे पर सोवियत रूस का दबदबा था। एक हिस्सा कम्युनिस्ट की तरफ झुकाव वाला था, जबकि दूसरा हिस्सा पूंजीवादी देशों की तरफ झुकाव वाला था। इसी वजह से कोरिया में ही 2 अलग-अलग राजनीतिक विचारधारा में टकराव शुरू हुआ, जिसे दुनिया के ताकतवर देशों की शह मिली। इसके परिणामस्वरूप देश दो हिस्सों में बंट गया। इस जंग में करीब 50 लाख लोगों की दोनों तरफ मौत हुई थीं।
  • इस युद्ध में लोग कोरिया की चर्चा इसलिए कर रहे हैं क्योंकि तब भी जब कोरिया के अंदर लड़ाई शुरू हुई तो नॉर्थ कोरिया का समर्थन कम्युनिस्ट सोवियत संघ और साम्यवादी चीन कर रहे थे, दूसरी तरफ साउथ कोरिया था जिसकी रक्षा अमेरिका कर रहा था। अब भी स्थिति लगभग एक जैसी है।

कोरिया युद्ध के दौरान भारत की क्या थी भूमिका?

नॉर्थ कोरिया और साउथ कोरिया युद्ध के दौरान ज्यादातर देश दो हिस्सों में बंटे हुए थे। इस समय भारत इकलौता ऐसा बड़ा देश था, जिसका किसी ओर झुकाव नहीं था। यही वजह थी कि भारत ने इस जंग के दौरान और इसे खत्म कराने में ये बड़ी भूमिका निभाई।

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