राहुल की ताजपोशी फिर टलेगी, महाराष्ट्र, उदयपुर ने कांग्रेस को चिंता में डाला

अजीत मैंदोला, नई दिल्ली:
राहुल गांधी की ताजपोशी के एक बार फिर टलने के आसार पैदा हो गए हैं। सूत्रों की माने तो अगले महीने होने वाला कांग्रेस अध्य्क्ष का चुनाव कुछ महीनों के लिये फिर टाला जा सकता है। पिछले साल कांग्रेस ने कोरोना के चलते अध्य्क्ष का चुनाव एक साल के लिये टाल दिया था। साथ ही पार्टी के चुनावों के कार्यक्रमो की घोषणा की थी। जिसके तहत अगले महीने 21अगस्त 30 सितंबर के बीच राष्ट्रीय अध्य्क्ष का चुनाव होना था।लेकिन अब जो संकेत मिल रहे चुनाव साल के आखिर तक जा सकता है। चुनाव टाले जाने के पीछे कई कारण निकल कर सामने आ रहे है। एक तो राहुल गांधी से ईडी की पूछताछ। इस बीच राजस्थान उदयपुर की घटना के साथ साथ महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी की सरकार का गिरना। कांग्रेस तीनो मामलों को लेकर खासी चिंतित है। कांग्रेस तय नहीं कर पा रही है कि वह क्या करे? लगातार हार उसके बाद देश में एक बार फिर से हिंदुत्व के मुद्दे के जोर पकड़ने से कांग्रेस की चिंता बढ़ गई है। हालांकि कांग्रेस अपने रवैये में कोई बदलाव लाने को तैयार नहीं है।

कांग्रेस को मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति के चलते नुकसान हुआ

कांग्रेस का मानना है कि धर्म की राजनीति के चलते देश के हालात बहुत चिंता जनक है। माहौल लगातार बिगड़ रहा है। कांग्रेस के पूर्व अध्य्क्ष राहुल गांधी तो देश के बिगड़े माहौल के लिए सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराते हैं। दरअसल कांग्रेस अभी भी यही समझ रही है कि देश का बदला माहौल बीजेपी को ही चुनाव में नुकसान करेगा और जो भी पार्टी मुखर हो कर प्रधानमंत्री मोदी की खिलाफत करेगी उसे ही लाभ मिलेगा। कांग्रेस के अंदर यही बहस छिड़ी हुई है कि क्या यह रणनीति सही है? क्योंकि 2014 के लोकसभा चुनाव में हुई करारी हार के बाद वरिष्ठ नेता एके एंटनी ने हार के कारणों की जांच कर अपनी रिपोर्ट में साफ किया था कि कांग्रेस को मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति के चलते नुकसान हुआ है। राहुल गांधी की अगुवाई में पार्टी ने एंटनी की रिपोर्ट को महत्व नहीं दिया और 2019 में पार्टी की फिर करारी हार हुई।

पीछे से पार्टी चला रहे राहुल

राहुल गांधी की अगुवाई में कांग्रेस ने मोदी के खिलाफ आक्रमक रुख अपना तमाम मुद्दे उठाए लेकिन हिंदुत्व के चलते बीजेपी की शानदार वापसी हुई। इसके बाद राहुल ने अध्य्क्ष पद छोड़ तो दिया, लेकिन पीछे से पार्टी खुद ही चला रहे हैं। उनकी इस रणनीति से पार्टी में विरोध के ज्यादा सुर उठे तो पार्टी की कार्यसमिति में संगठन के चुनावों के कार्यक्रम की घोषणा कर दी। विरोध शांत हो गया। फिर पांच राज्यों की करारी हार के बाद अंसन्तुष्ठ नेताओं ने सवाल उठाये तो संकल्प शिविर कर साफ कर दिया गया राहुल हमारे नेता हैं और चुनाव के समय जिम्मेदारी संभाल लेंगे। इसके बाद अंसन्तुष्ठ कुछ नेताओं को राज्यसभा दे दी गई। लेकिन फिर घटित घटनाओं ने कांग्रेस को परेशानी में डाल दिया। हरियाणा राज्यसभा चुनाव में पार्टी की हार से उभरती। राहुल को ईडी ने समन जारी कर दिया। सोनिया गांधी अस्वस्थ हो गई। कांग्रेस राहुल से ईडी की पूछताछ के खिलाफ दिल्ली में हफ्ते भर शक्ति प्रदर्शन किया। उसको लेकर भी सवाल उठे। पार्टी वही कर रही है जो बीजेपी को सूट कर रहा है।

सोनिया बीमारी के बाद अब कम सक्रिय रहेंगी

बीजेपी परिवारवाद को बड़ा मुद्दा बनाया हुआ है। उसका उसे 5 राज्यों के चुनाव में लाभ भी मिला। कांग्रेस ने प्रदर्शन कर एक तरह परिवार वाद का आगे बढ़ाया। यह मामला शांत होता बीजेपी ने महाराष्ट्र में सरकार गिरा ऐसा ऑपरेशन कर दिया कि राजनीति के धुरंदर पंडित भी अभी तक समझ नही पा रहे हैं प्रधानमंत्री मोदी ने क्या किया? कुछ जानकार मानते हैं परिवार वाद वाली एक पार्टी शिवसेना को निपटाने की रणनीति है। अगर ऐसा होता है तो महाराष्ट्र से भी कांग्रेस के लिये बुरी खबर है। बीजेपी ने महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे की सरकार बना सरकार के गठन को हिंदुत्व से जोड़ दिया। इस बीच उदयपुर के विभत्स हत्या ने पूरे देश मे हिंदुत्व के मुद्दे को फ्रंट पर ला खड़ा कर दिया। कांग्रेस में अब यही मंथन चल रहा है कि बदले माहौल में राहुल की ताजपोशी को अभी टाला जाये। कुछ सूत्रों का कहना राहुल अभी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है। यह तो तय है कि प्रियंका गांधी अध्य्क्ष नहीं बनेगी। राहुल ही अध्य्क्ष बनेंगे नहीं तो जो व्यवस्था चल रही है वही चलेगी। सोनिया बीमारी के बाद अब कम सक्रिय रहेंगी। राहुल गांधी अध्य्क्ष बने या न बने वो ही सब कुछ तय करेंगे। हालांकि बाकी चुनाव की प्रक्रिया को अगस्त में पूरा कर लिया जाएगा।

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