भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने कृत्रिम स्मार्ट पैर किया विकसित

– दिव्यांगों को सेंसर डाटा से मिलेगी अपनी हर चाल की जानकारी

इंडिया न्यूज, नई दिल्ली, (Indian Space Research Organization ) । भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने एक कृत्रिम स्मार्ट पैर विकसित किया है। जो दिव्यांग लोगों को चलने में काफी आरामदायक होगी। इसे जल्द ही व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए निर्मित किया जाएगा। यह स्मार्ट पैर अन्य कृत्रिम पैरों से दस गुना सस्ता भी होगा।

इस नई स्मार्ट तकनीक को कहा जाता है एमपीके

इस नई स्मार्ट तकनीक को एमपीके (माइक्रोप्रोसेसर-नियंत्रित घुटना) कहा जाता है। यह निष्क्रिय अंग के लिए काफी उपयोगी है। इसका वजन लगभग 1.6 किलोग्राम है। इसरो ने बताया कि इस समय विकसित हो रहे स्मार्ट अंग ने एक विकलांग व्यक्ति को न्यूनतम समर्थन के साथ रास्ते पर करीब 100 मीटर चलने में सक्षम बनाया है।

इन स्मार्ट माइक्रोप्रोसेसर नियंत्रित घुटनों (एमपीके) को नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर लोकोमोटर डिसेबिलीटीज (एनआईएलडी), पंडित दीन दयाल उपाध्याय नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर पर्सन्स विद फिजिकल डिसेबिलीटीज और आर्टिफिशियल लिंब मैन्युफैक्चरिंग कॉरपोरेशन आॅफ इंडिया (एएलआईएमसीओ) के साथ इसरो के विक्रमभाई साराभाई स्पेस सेंटर द्वारा विकसित किया जा रहा है।

इस स्मार्ट अंग में सेंसर डाटा के आधार पर चाल की स्थिति का लगेगा पता

इसरो ने बताया कि इस स्मार्ट अंग में एक माइक्रोप्रोसेसर, हाइड्रोलिक डैपर, लोड एंड नी एंगल सेंसर, कंपोजिट नी-केस, ली-आयन बैटरी, इलेक्ट्रिकल हारनेस और इंटरफेस जैसे तत्वों का प्रयोग किया गया है। यह सेंसर डाटा के आधार पर चाल की स्थिति का पता लगाएगी और कंट्रोल सॉफ्टवेयर सिस्टम से चाल की गति नियंत्रित करेगी और जरूरी रीयल-टाइम का अनुमान लगाएगी। इससे दिव्यांगों को काफी लाभ होगा।

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