‘आत्मनिर्भर गुजरात से आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में गुजरात का एक विशिष्ट कदम

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने देश की आजादी के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के अंतर्गत ‘आत्मनिर्भर भारत’ बनाने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात ने इस आह्वान को स्वीकार कर आत्मनिर्भर गुजरात से आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिए एक महत्वपूर्ण योजना का ऐलान किया है।

मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल ने उद्योगों को आत्मनिर्भरता के लिए सहायता हेतु ‘द आत्मनिर्भर गुजरात स्कीम्स फॉर असिस्टेंस टू इंडस्ट्रीज’ योजना की उद्योग राज्य मंत्री श्री जगदीश विश्वकर्मा की उपस्थिति में घोषणा की।

उन्होने कहा प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में भारत दुनिया में सबसे तेजी से विकसित हो रही अर्थव्यवस्था के रूप में उभरा है। ऐसे में इस योजना का मूल्य उद्देश्य इन अवसरों का लाभ उठाते हुए उद्योगों को आकर्षित कर और स्थानीय उत्पादों को सहयोग प्रदान कर गुजरात को रोजगार और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्रों में गुजरात को आत्मनिर्भर बनाना है।
मुख्यमंत्री ने इस महत्वाकांक्षी योजना के संबंध में विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि गुजरात उद्यमियों और उद्यमिता की भूमि तथा देश का मैन्युफैक्चरिंग हब है।

गुजरात ऐसी अपार क्षमताओं के परिणामस्वरूप प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत के विजन को साकार करने में आत्मनिर्भर गुजरात के जरिए नेतृत्व करने को तत्पर है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि इस विजन को पूरा करने के लिए आने वाले वर्षों में देश में रणनीतिक और थ्रस्ट एरिया (महत्वपूर्ण क्षेत्र) के उद्योगों को जिन विशेष सहायताओं की आवश्यकता है, उसे पूरा करने में यह स्कीम उपयुक्त साबित होगी।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कॉप-26 समिट में ‘पंचामृत’ का विचार दिया है। इस विचार के अनुकूल उद्योगों को ‘क्लीनर मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टीसेज’ और ‘डी कार्बनाइजेशन इनिशियेटिव’ अपनाकर विश्व के साथ प्रतिस्पर्धा में खड़े रहने के लिए प्रोत्साहित हेतु भी यह स्कीम्स आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इस ‘द आत्मनिर्भर गुजरात स्कीम्स फॉर असिस्टेंस टू इंडस्ट्रीज’ के मार्फत राज्य सरकार ने उद्यमियों की उद्यमशीलता और उनकी अपेक्षाओं को और भी अधिक प्रोत्साहित कर, उनके निवेश के जोखिमों को कम करने का लक्ष्य रखा है।

यह स्कीम्स राज्य में उद्यमिता के लिए नया वातावरण सृजित करने के साथ ही युवा उद्यमियों को नवाचार के माध्यम से जॉब क्रिएटर (नौकरी देने वाला) बनने के लिए प्रेरित करेगी और बड़ी संख्या में क्वालिटी जॉब के अवसर पैदा होंगे।

इतना ही नहीं, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई), लार्ज और मेगा इंटरप्राइजेज को मिलने वाले एम्प्लॉयमेंट लिंक्ड इंसेंटिव्स यानी रोजगार से जुड़े प्रोत्साहनों से राज्य में इंडस्ट्रियल वर्क फोर्स तैयार करने में भी गति आएगी।
इसके अलावा, राज्य में न्यू मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का विकास होने से उसके अनुषांगिक छोटे-बड़े उद्योगों का एक पूरा इकोसिस्टम तैयार होगा, जो मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में वैश्विक मिसाल बनेगा।

उन्होंने कहा कि देश के मैन्युफैक्चरिंग आउटपुट (उत्पादन) में गुजरात की लगभग 33 लाख एमएसएमई इकाइयों का सबसे बड़ा योगदान है।

इतना ही नहीं, निर्यात के मामले में भी गुजरात देश भर में अग्रणी है। एमएसएमई सेक्टर युवाओं के लिए रोजगार निर्माण तथा ग्रामीण एवं पिछड़े क्षेत्रों के औद्योगीकरण के जरिए राष्ट्र निर्माण में उल्लेखनीय योगदान दे रहा है।

‘द आत्मनिर्भर गुजरात स्कीम्स फॉर असिस्टेंस टू इंडस्ट्रीज’ के अंतर्गत एमएसएमई को मिलने वाले लाभ

• नेट एस.जी.एस.टी. रिइंबर्समेट (प्रतिपूर्ति) के तहत उद्योगों को फिक्स्ड कैपिटल इन्वेस्टमेंट यानी निश्चित या स्थायी पूंजी निवेश का 75 फीसदी तक, 10 वर्षों तक मिलेगा
• माइक्रो इंडस्ट्रीज के लिए 35 लाख रुपए तक की कैपिटल सब्सिडी
• एमएसएमई के लिए 7 वर्षों तक 35 लाख रुपए तक की वार्षिक ब्याज सब्सिडी
• 10 वर्षों के लिए ईपीएफ रिइंबर्समेंट
• 5 वर्षों के लिए विद्युत शुल्क से मुक्ति
• महिलाओं, युवाओं और दिव्यांग उद्यमियों के लिए अतिरिक्त इंसेंटिव्स

आत्मनिर्भर गुजरात स्कीम्स फॉर असिस्टेंस टू इंडस्ट्रीज के अंतर्गत बड़े उद्योगों को मिलने वाले लाभ
इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम में एमएसएमई का रणनीतिक स्थान है, उसी परिपाटी पर ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग चैंपियनों को भी विकास के लिए प्रोत्साहित करने हेतु गुजरात में बेहतर तरीके से विकसित बिजनेस इकोसिस्टम है।

पॉलिसी ड्रिवन स्टेट के रूप में निवेश अनुकूल नीतियां और विशाल बुनियादी ढांचा सुविधाएं बड़े (लार्ज स्केल) निवेश भी आकर्षित करती हैं।

ऐसे निवेश राज्य और राष्ट्र की अर्थव्यवस्था तथा रोजगार सृजन में बहुउद्देशीय भूमिका अदा करेंगे। ये निवेश राज्य में एमएसएमई के लिए फॉरवर्ड-बैकवर्ड लिंकेज भी प्रदान करेंगे।

राज्य सरकार द्वारा ‘आत्मनिर्भर गुजरात स्कीम फॉर असिस्टेंस टू लार्ज इंडस्ट्रीज’ के लिए घोषित विशेष प्रोत्साहन निम्नानुसार हैः

• आत्मनिर्भर भारत के विजन को ध्यान में रखकर मैन्युफैक्चरिंग के वैश्विक रुझानों के अनुसार 9 थ्रस्ट सेक्टरों (22 सब-सेक्टर) की पहचान मुख्य मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के रूप में की गई है
• बड़े उद्योगों को फिक्स्ड कैपिटल इन्वेस्टमेंट पर 12 फीसदी तक की कुल ब्याज सब्सिडी
• 10 वर्षों के लिए ईपीएफ रिइंबर्समेंट
• नेट एसजीएसटी रिइंबर्समेंट के अंतर्गत उद्योगों को फिक्स्ड कैपिटल इन्वेस्टमेंट का 75 फीसदी तक, 10 वर्षों तक प्राप्त होगा
• 5 वर्षों के लिए विद्युत शुल्क से मुक्ति

आत्मनिर्भर गुजरात स्कीम्स फॉर असिस्टेंस टू इंडस्ट्रीज के अंतर्गत मेगा इंडस्ट्रीज की मुख्य विशेषताएः
राज्य सरकार की मंशा दुनिया के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए राज्य में मेगा स्केल मैन्युफैक्चरिंग इंटरप्राइजेज को तेजी देकर अर्थव्यवस्था का स्केल बढ़ाने की है।

उद्योग राज्य मंत्री ने इस संदर्भ में आत्मनिर्भर गुजरात स्कीम्स फॉर असिस्टेंस टू इंडस्ट्रीज के अंतर्गत मेगा इंडस्ट्रीज को दिए जाने वाले प्रोत्साहनों के विषय में भी जानकारी दी।

• ऐसी इंडस्ट्रीज के लिए मैन्युफैक्चरिंग के वैश्विक रुझानों के अनुसार 10 थ्रस्ट सेक्टर (23 सब-सेक्टर) की पहचान मुख्य मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के रूप में की गई है
• 2500 करोड़ रुपए से अधिक के निवेश वाली और 2500 से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान करने वाली औद्योगिक इकाइयों को इस स्कीम के अंतर्गत विशेष इंसेंटिव दिया जाएगा
• इंडस्ट्रीज को फिक्स्ड कैपिटल इन्वेस्टमेंट पर 12 फीसदी तक की कुल ब्याज सब्सिडी
• 10 वर्षों के लिए ईपीएफ रिइंबर्समेंट
• नेट एसजीएसटी रिइंबर्समेंट के अंतर्गत उद्योगों को फिक्स्ड कैपिटल इन्वेंस्टमेंट का 18 फीसदी तक, 20 वर्षों तक मिलेगा
• प्रोजेक्ट के लिए खरीदी गई या लीज की जमीन पर स्टाम्प शुल्क और पंजीयन शुल्क में 100 फीसदी माफी
• 5 वर्षों के लिए विद्युत शुल्क से मुक्ति

उद्योग राज्य मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि इस पूरी योजना से गुजरात आने वाले दिनों में देश के मैन्युफैक्चरिंग परिदृश्य में आत्मनिर्भरता से अपना विशिष्ट स्थान बनाएगा।

एक अनुमान के मुताबिक आत्मनिर्भर गुजरात स्कीम्स फॉर असिस्टेंस टू इंडस्ट्रीज योजना के परिणामस्वरूप राज्य में 12.50 लाख करोड़ रुपए का भारी निवेश आएगा। इतना ही नहीं, इसके चलते लगभग 15 लाख रोजगार के विशाल अवसरों का सृजन भी होगा।

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