जानिए खुद के साथ रिश्ते को कैसे बेहतर बनाएं ?

इंडिया न्यूज (improve Relationships with Yourself)
कभी कभी खुद के अंदर स्वयं को लेकर एक हीन भावना और निराशा का भाव आने लगता है इससे हम अपने आपको कमजोर और दुखी महसूस करते हैं और धीरे-धीरे हमारा व्यक्तित्व निराशावादी और शिकायत करने वाला बनता चला जाता है। जो हमेशा दूसरों की कॉपी करने की सोचता है और प्रयास करता है। इससे हम अपनी क्षमताओं और सामर्थ्य के बारे में सोचना बंद कर देते हैं और इसलिए हमारा खुद से संपर्क टूटने लगता है। हम बिना सोचे-समझे काम करने लगते हैं और स्वयं के जीवन की असीम संभावनाओं को छोड़कर बस एक कॉपी बनके रह जाते हैं। तो चलिए जानते हैं हम अपने जीवन क्या क्या बदलाव करें। जिससे खुद से रिश्ता जुड़ा रहे।

सेहत का रखें ख्याल

सबसे पहले अपने शरीर को स्वस्थ रखने के उपायों के बारे में पता लगाएं, अपने खाने-पीने की आदतों का अध्ययन करें। इस काम में किसी आहार विशेषज्ञ की मदद लें। अगर कोई भी ऐसा पहलू है जिससे कोई नुकसान होता हो तो उससे दूरी बनाएं जैसे अगर सिगरेट पीने की आदत है तो उसे तुरंत छोड़ दें। अपने खाने में फल और सब्जियों की मात्रा बढ़ाएं जिससे आपके शरीर में स्वस्थ होने की प्रक्रिया शुरू हो सके। इसके अलावा अपने जीवन में सक्रिय रहने की शुरूआत करें। कोई न कोई व्यायाम जैसे योग, जिम या कोई शारीरिक खेल जो आपको पसंद हो तुरंत शुरू कर दें। इससे आपके शरीर में एक नई ऊर्जा का निर्माण और संचार होगा।

मानसिक क्षमताएं बढ़ाएं

सबसे पहले उन चीजों की सूची बनाएं जिनको अपने शुरूआती दिनों में आप पाने की सोचते थे, जैसे जब मैं बड़ी हो जाऊंगी तो ये करूंगी, जब मैं पैसा कमाऊंगी तो इस चीज को लूंगी इत्यादि। अपने पुराने दोस्तों को ढूंढें और उनके साथ गुजरे अपने समय को याद करें। पता लगाएं कि उस समय आप किस तरह का जीवन जीना चाहते थे और उन सब बातों की भी एक सूची बनाएं। अपनी पुरानी आदतों के बारे में सोचें, जैसे आप निर्णय लेने में कैसी थीं। क्या आप कामों को टालती थीं या तुरंत करने की आदत थी, किसी सफल इंसान को देखकर कैसा लगता था। प्रतिस्पर्धा करने का मन करता था या ईर्ष्या की भावना आती थी। इन सब बातों को सोचें और अगर कोई ऐसी बात आपको समझ में आए, जिसे आज बदलना है तो उसे नोट कर लें। खुद में सुधार करने की शुरूआत करें और ये भी तय कर लें कि जब तक आप अपने निर्धारित उद्देश्य तक नहीं पहुंचेंगे, तब तक प्रयास करना बंद नहीं करेंगे।

सामाजिक सरोकार बढ़ाएं

सामाजिक कार्यों में हिस्सा लेना शुरू करें, लोगों से जब भी मिलें तो उनकी बातों को सम्मान पूर्वक सुनें, बोलते समय बीच में टोका-टाकी न करें। त्नहर इंसान अपने आप में एक तरह की किताब है जो अच्छी-बुरी भावनाओं से बनी है। जब आप दूसरों में रुचि लेना शुरू करते हैं, तब आप में अपने लिए समझ बढ़ने लगती है। कोशिश करें कि आप अपने आसपास के लोगों के लिए उपयोगी इंसान साबित हों। हंसने और मुस्कराने की आदत बना लें और हमेशा अपने आपको दूसरे इंसान की जगह पर रखकर सोचें और अपने जीवन को बदलें। जीवन की कड़वी यादों को भुलाने का ईमानदारी से प्रयास करें। ऐसे लोगों के बारे में पढ़ें जिन्हें समाज अपना आदर्श मानता है और उनका अनुसरण करें। ऐसा करने से अपने लिए ज्यादा समय होगा, सामाजिक रूप में सफल होंगे, हमारा ज्यादा से ज्यादा ध्यान खुद पर केन्द्रित होने लगेगा। और फिर हम खुद को अपने से जुड़ा महसूस कर पाएंगे और नित नए सोपान चढ़के जीवन को बहुउपयोगी बना पाएंगे।

छोटे बदलाव करते रहें

जीवन उपयोगी कोई नई आदत बनाएं, रोज कुछ नया पढ़ने का अभ्यास करें, मेडिटेशन और रिलैक्सेशन सीखें और उनका उपयोग करें। अपने जीवन के हर हिस्से में कोई न कोई बदलाव करें। जैसे अपने कमरे में, काम करने की जगह पर, अपने कपड़ों में। कभी भी एक जैसी दिनचर्या न होने दें। समय-समय पर अपनी दिनचर्या में बदलाव लाएं, स्वयं के साथ समय बिताएं, डायरी लिखें और कुछ समय के बाद उसे जरूर पढ़ें जिससे आपको अपने जीवन की ज्यादा समझ बढ़ेगी। अगर जीवन में किसी कमी का एहसास हो रहा है तो उसका पता लगाएं और नए-नए तरीके सीखें कुछ हासिल करने और जीवन में आगे बढ़ने के।

खुद से रिश्ता टूटने का एहसास

जीवन में कई पल ऐसे आते हैं जब हमें लगता है कि हम अपने जीवन में उन लक्ष्यों को हासिल कर रहे हैं जिन्हें हमेशा से पाना चाहते थे। लेकिन उन लक्ष्यों को हासिल करने के बाद भी हमें सफलता और खुशी का उतना एहसास नहीं होता है जितना हम हमेशा सोचते थे। जीवन में एक अधूरापन महसूस होने लगता है और कुछ कम होने की भावना बनी रहती है। इस वजह से हम ज्यादा प्रयास करते हैं पर इसके बाद भी कई परेशानियों का समाधान नहीं हो पाता। इसके कारण धीरे-धीरे हमारे बर्ताव में गुस्सा, चिड़चिड़ापन, खुद के बारे में और दूसरों के बारे में नकारात्मक विचार आने लगते हैं। हम लोगों से बात करते समय उनकी कमियां गिनाने की कोशिश करते हैं। खुद के बारे में जब भी बोलते हैं तो हमेशा ऐसा दिखाते हैं कि सबने कितना बुरा किया है, पुरानी बातों को भूलना बहुत मुश्किल लगता है। ये कुछ उदाहरण हैं जिनसे पता लगने लगता है कि आपका रिश्ता स्वयं से कमजोर हो गया है।

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