जानिए कौन हैं गिनी में तख्तापलट करने वाले ‘वॉर मास्‍टर’ कर्नल मामादी डौंबुया

इंडिया न्यूज, कॉनाक्री:
पश्चिमी अफ्रीकी देश गिनी (Guinea) में इस समय काफी हलचल है और रविवार को यहां पर राष्ट्रपति अल्फा कोंडे को गिरफ्तार कर लिया गया था। इसके बाद से देश पर मिलिट्री का शासन है। मिलिट्री की तरफ से कहा गया है कि प्रांत के गर्वनर्स की जगह अब रीजनल कमांडर्स शासन की जिम्मेदारी लेंगे। गिनी में ऐसा पहली बार नहीं हुआ है और इस देश में अक्सर मिलिट्री लोकतंत्र पर हावी रही है। गिनी में जो कुछ भी हुआ है उसके पीछे लेफ्टिनेंट कर्नल मामादी डौंबुया (Colonel Mamadi Daumbuya) को जिम्मेदार माना जा रहा है। हालांकि यह पहला मौका था जब देश धीरे-धीरे लोकतंत्र की तरफ बढ़ रहा था मगर अब यह फिर से उसी परंपरा की तरफ लौट गया है। मिलिट्री की तरफ से कोंडे को कब रिहा किया जाएगा, इस बारे में कोई भी जानकारी देने से इनकार कर दिया गया है। हालांकि मिलिट्री ने बताया है कि 83 साल के राष्ट्रपति को मेडिकल केयर के साथ ही उनके डॉक्टरों की मदद मुहैया कराई जा रही है। गिनी के तख्तापलट ने हर किसी को हैरान कर दिया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस तख्तापलट के लिए जिम्मेदार कर्नल मामादी डौंबुया आखिर कौन हैं? दरअसल ले. कर्नल मामादी गिनी आर्मी के स्पेशल फोर्सेज ग्रुप के मुखिया हैं। डौंबुया कांकन बॉर्डर के रहने वाले हैं और ये कोटे डी आइवर और माली के बीच पड़ता है। साल 2018 में डौंबुया पहली बार सुर्खियों में आए थे। उस समय उन्हें कोनाकरि में हुई एक मिलिट्री परेड में देखा गया था। ये परेड देश की आजादी के 60वें वर्ष पर आयोजित की गई थी। हाल ही में जब स्पेशल फोर्सेज ग्रुप को तैयार किया गया तो डौंबुया को इसका जिम्मा सौंपा गया। इस स्पेशल फोर्स का गठन आतंकवाद और समुद्री डाकुओं से निपटने के लिए किया गया था। 41 साल के डौंबुया फें्च विदेशी फौज का हिस्सा रहे हैं और मास्टर कॉरपोरल की रैंक से वो स्पेशल फोर्स को कमांड करने तक की जिम्मेदारी संभालते हुए नजर आए। पेरिस स्थित कोले डी गुएरे वॉर कॉलेज से ग्रेजुएट होने वाले डौंबुया के पास 15 साल का मिलिट्री अनुभव है जिसमें कोटे डी आइवर, जिबूती, मध्य अफ्रीकी गणतंत्र, अफगानिस्तान और दूसरे क्षेत्रों में शामिल मिशंस का भी वो हिस्सा रहे हैं। डौंबुया को डिफेंस मैनेजमेंट, कमांड और स्ट्रैटेजी का एक्सपर्ट माना जाता है। उन्होंने इजरायल, सेनेगल और गाबोन में स्पेशल ट्रेनिंग तक हासिल की हुई है। कर्नल मामादी को कुछ लोग वॉर मास्टर (War Master) के तौर पर भी बुलाते हैं।

 

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