AIIMS हैक के पीछे चीन-उत्तर कोरिया? आतंक के एंगल से जाँच कर रही NIA

इंडिया न्यूज़ (दिल्ली) : दिल्ली के ‘अखिल भारतीय आर्युविज्ञान संस्थान’ यानि AIIMS में हुए साइबर अटैक मामले में 2 कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है। दोनों कर्मचारी सिस्टम एनालिस्ट हैं। दोनों कर्मचारियों को पहले कारण बताओ नोटिस भेजा गया था। जवाब से संतुष्ट नहीं होने पर एम्स प्रशासन ने दोनों को सस्पेंड कर दिया है।

इधर मामले की जाँच तेज हो गई है। जाँचकर्ताओं ने आशंका जताई है कि यह साइबर हमला चीन या नॉर्थ कोरियायी हैकर्स के द्वारा किया गया हो सकता है। दिल्ली पुलिस की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस यूनिट ने 25 नवंबर, 2022 को जबरन वसूली और साइबर आतंकवाद का मामला दर्ज कर लिया है। मामले की जाँच NIA भी कर रही है। जानकारी के मुताबिक एनआईए इस हैकिंग की जाँच टेरर एंगल से करेगी।

हैकर्स ने क्रिप्टो में मांगी है फिरौती

रिपोर्ट्स के मुताबिक, एम्स के कंप्यूटर्स पर रैनसमवेयर नाम का साइबर हमला हुआ है। यह हमले मोटी रकम वसूली के लिए ही किए जाते हैं। रिपोर्ट्स की मानें तो हैकर्स ने अस्पताल से फिरौती के तौर पर क्रिप्टोकरेंसी में 200 करोड़ रुपए की माँग की है। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने कहा है कि एम्स के अधिकारियों को अब तक फिरौती माँगे जाने से जुड़ी कोई जानकारी नहीं मिली है।

इस बीच दिल्ली एम्स की तरफ से जानकारी दी गई है कि सर्वरों की स्कैनिंग का काम जारी है। अब तक 50 में से 30 सर्वर में एंटी वायरस डालकर स्कैन किया जा चुका है। एम्स में लगभग 5000 कंप्यूटर हैं। फिलहाल 2000 कंप्यूटरों की स्कैनिंग का काम हो चुका है। सर्वर पूरी तरह से ठीक होने में 5 दिन का समय लग सकता है।

जरुरी सेवाएं ऑफलाइन मोड में जारी

जानकरी दें, 23 नवंबर, 2022 से ही एम्स दिल्ली में ऑनलाइन सेवाएँ बाधित हैं। फिलहाल जरूरी सेवाएँ ऑफलाइन मोड में चल रही हैं। ऐसे में मैनुअल मोड में काम के लिए कर्मचारियों की संख्या भी बढ़ाई गई है, ताकि इलाज के लिए दूर-दूर से आ रहे मरीजों को दिक्कत न हो। मरीजों का ओपीडी कार्ड हाथ से बनाया जा रहा है। एडमिशन प्रोसेस भी हाथ से लिखकर किए जा रहे हैं। यहाँ तक कि सैंपल जाँच भी मैन्युअली ही हो रही है।इलाज पर इसका बहुत ज्यादा असर तो नहीं हो रहा है, लेकिन काम में समय अधिक लग रहा है। एम्स की तरफ से नोटिस जानकारी दी गई है कि इस हफ्ते एम्स नेटवर्क को फॉर्मेट किया जाएगा। ताकि आगे के लिए सिस्टम को और भी सुरक्षित किया जा सके।

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