Inflation Rising Due To Ukraine Russia War : रूस यूक्रेन युद्ध का असर आम जनता की जेब पर, जानिए कैसे?

इंडिया न्यूज, नई दिल्ली:
Inflation Rising Due To Ukraine Russia War
: 24 फरवरी से शुरू हुआ रूस और यूक्रेन युद्ध आज 14वें दिन में प्रवेश कर गया। इस युद्ध का परिणाम रूस को कई तरह से भुगतना पड़ रहा है-जैसे कि अमेरिका की ओर से रूस पर कई तरह के प्रतिबंध लगाया जाना। वहीं भारत समेत कई देशों को महंगाई की मार झेलनी पड़ रही है। तो चलिए जानते हैं इन दो देशों की आपसी लड़ाई का असर अन्य देशों में कैसे पड़ रहा है।

बढ़ सकती है गेहूं की कीमत (Inflation Rising Due To Ukraine Russia War)

  • रूस और यूक्रेन दुनिया के बड़े गेहूं एक्सपोर्टर हैं। रूस जहां दुनिया में गेहूं एक्सपोर्ट करने के मामले में पहले नंबर पर है, तो वहीं यूक्रेन पांचवां बड़ा गेहूं एक्सपोर्टर है। कजाकिस्तान, जॉर्जिया, तुर्की, इजिप्ट और पाकिस्तान टॉप 5 देश हैं जो रूस से गेंहूं इंपोर्ट करते हैं। वहीं यमन, लीबिया और लेबनान जैसे देश जो पहले से ही युद्ध से गुजर रहे हैं वो अपने गेहूं के लिए यूक्रेन पर निर्भर हैं।
  • यमन अपनी खपत का 22 फीसदी यूक्रेन से इम्पोर्ट करता है। लीबिया लगभग 43 फीसदी और लेबनान अपनी खपत का लगभग आधा गेहूं यूक्रेन से इंपोर्ट करता है। इस टकराव से इन देशों में अस्थिरता और ज्यादा बढ़ सकती है। इससे आने वाले समय में गेहूं के दाम बढ़ने लगे हैं। इससे दलिया, ब्रेड, बिस्किट, नूडल्स, पिज्जा और सूजी के अलावा गेहूं से बने अन्य आइटम महंगे हो जाएंगे।

एलपीजी और सीएनजी की कीमतों पर पड़ेगा असर

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LPG CNG Gas Price: यूक्रेन-रूस युद्ध के कारण नेचुरल गैस की सप्लाई चेन को नुकसान हुआ है। दुनिया की कुल नेचुरल गैस उत्पादन में 17 फीसदी हिस्सा रूस का है। ऐसे में यूक्रेन-रूस विवाद से इसकी सप्लाई प्रभावित हो रही है। इससे वैश्विक स्तर पर गैस की कमी का असर दिखने लगा है और आने वाले दिनों में एलपीजी और सीएनजी में प्रति किलो 10 से 15 रुपए तक बढ़ सकते हैं।

35 रुपए तक बढ़े तेल के दाम (Inflation Rising Due To Ukraine Russia War)

सनफ्लावर आयल के मामले में भारत इसके लिए लगभग पूरी तरह से रूस और यूक्रेन पर निर्भर है। भारत में होने वाले सनफ्लावर आयल के कुल इम्पोर्ट का 90 फीसदी से ज्यादा इन्हीं दो देशों से आता है। रूस-यूक्रेन युद्ध के साथ ही देश में सूरजमुखी के तेल की सप्लाई थम गई है। इसके चलते खरीददार सूरजमुखी के तेल के विकल्प के तौर पर पाम तेल और सोया तेल की तरफ रुख कर रहे हैं। इससे इन तेलों के दाम बढ़ने लगे हैं। रूस और यूक्रेन युद्ध के दौरान ही इसकी कीमत में 10 से 35 रुपए की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

पेट्रोल-डीजल के बढ़ सकते हैं दाम

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  • एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि पेट्रोल-डीजल के दामों में 25 रुपए तक की बढ़ोतरी हो सकती है। वहीं सरकारी तेल कंपनियां जल्द ही इनकी कीमत में छह रुपए तक की बढ़ोतरी कर सकती है।
  • बता दें कि रूस आयल और नेचुरल गैस का एक मेजर प्रोड्यूसर है। यूरोपियन यूनियन के नेचुरल गैस इंपोर्ट की लगभग 40 फीसदी सप्लाई रूस करता है। कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से पेट्रोल-डीजल महंगे हो जाएंगे। इससे ट्रांसपोर्ट कॉस्ट में बढ़ोतरी होगी और इससे खाने-पीने के सामान महंगे हो जाएंगे। कच्चे तेल के दाम 140 डॉलर रुपए प्रति बैरल पर पहुंच गए हैं जो 14 साल का हाई लेवल है।

डॉलर के मुकाबले रुपया हुआ कमजोर

रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते रुपए पर दबाव बना हुआ है और इसी का नतीजा है कि ये डॉलर के मुकाबले सबसे कमजोर हालत में पहुंच गया है। अभी एक डॉलर की कीमत 77 रुपए के पार निकल गई है। ऐसे में इससे महंगाई बढ़ने लगी है। डॉलर के मजबूत होने से पेट्रोल-डीजल से लेकर विदेश में पढ़ाई करना सब महंगा हो जाएगा। एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले दिनों में डॉलर 80 रुपए तक पहुंच सकता है।

सोना-चांदी, निकल, एल्यूमीनियम और तांबे के दामों में तेजी

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  • रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते फरवरी के आखिरी हफ्ते से अब तक कॉपर, जिंक, निकल, लेड और एल्युमिनियम जैसे बेस मेटल्स के दाम घरेलू बाजार में 201 फीसदी तक बढ़ गए हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तो इनमें 300 फीसदी से भी ज्यादा का उछाल आ चुका है। इसके चलते इलेक्ट्रॉनिक्स, व्हाइट गुड्स और बर्तन समेत वे तमाम वस्तुएं महंगी हो जाएंगी, जिनमें बेस मेटल्स इस्तेमाल होते हैं। इलेक्ट्रिक वाहनों में तो इन सभी मेटल्स का प्रयोग होता है।
  • सोने और चांदी के दामों में भी शानदार तेजी देखने को मिल रही है। रूस-यूक्रेस युद्ध के दौरान, यानी सिर्फ 13 दिनों में ही ये साढ़े 51 हजार से 54 हजार पर आ गया है। एक्सपर्ट्स के अनुसार सोना 56 हजार तक जा सकता है। इसके अलावा अगर चांदी की बात करें तो ये 67 हजार से 71 हजार पर आ गई है और इस साल 80 से 85 हजार रुपए प्रति किलोग्राम का लेवल दिखा सकती है। एल्यूमीनियम, निकिल और तांबे में आगे भी तेजी रहने की उम्मीद है।

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