जानिए दिमाग को ओवरथिंकिंग से कैसे बचाएं ?

इंडिया न्यूज (Overthinking)
जरूरत से ज्यादा सोचना व्यक्ति को बीमार बना देता है। हर कोई अपनी जिंदगी में कभी न कभी ऐसे दौर से गुजरता है, लेकिन जो इसे संभाल नहीं पाते वे डिप्रेशन या एंग्जाइटी का शिकार हो जाते हैं। चिंता भविष्य के लिए परेशान करती है, जबकि ओवरथिंकिंग पछतावा लाती है। ऐसे में ज्यादा जरूरी है कि दिमाग को दूसरी ओर लगाएं और मानसिक तौर पर थोड़ा आराम दें। तो चलिए आज के लेख में जानेंगे दिमाग को ओवरथिंकिंग से कैसे बचाएं।

अपने अनुभवों की सुनिए?

साइकोथेरेपिस्ट मुताबिक जब भी आप ज्यादा सोचना जैसा महसूस करें, अपनी मातृभाषा में खुद से चिल्लाकर कहिए बंद करो। यह आपको हास्यास्पद लग सकता है, लेकिन जब भी ऐसा हो, करके देखिए। दिमाग परेशान करने वाली बातें सोचना छोड़ देता है। अपने हाथ में रबर बैंड बांधिए और ऐसा कहते हुए उसे खींचिए। आप अपने आसपास ऐसे चित्र लगा सकते हैं। दरअसल हमारा लक्ष्य दिमाग को स्थिर करना है। वहीं खुद से यह कहना कि सोच सही नहीं है। कई अध्ययनों में यह बात सामने आई है कि जो लोग परेशानियों का समाधान अपने तजुर्बे से ढूंढ़ते हैं, वे डिप्रेशन का शिकार कम होते हैं। इसलिए अपने अनुभवों की सुनिए।

खुद को बिजी रखें

चिंता या ओवरथिंकिंग से बचने के लिए दिमाग भटकाने के लिए खुद को खुश रखिए। इसके कई तरीके हैं, जैसे दोस्तों से बात करिए। लेकिन उन्हें अपनी परेशानी मत बताइए। परेशानी बताने से आपका दिमाग वहीं रहेगा। अलग-अलग विषयों पर फिल्में देखिए जिसे समझने में दिमाग को मेहनत करनी पड़े। जब भी परेशान हों तो नहा लीजिए। मन को सुकून मिलेगा। नए-नए गाने सुनिए। डांस करिए या फिर जिम जाइए। खुद को व्यस्त रखिए फिर चाहे किताब पढ़िए या ध्यान लगाइए।

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