कैबिनेट हरियाणा राज्य डाटा सेंटर नीति, व्हीकल पॉलिसी समेत कई योजनाओं को दी मंजूरी

इंडिया न्यूज़, चंडीगढ़:
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में 27 जून को हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक मेें कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स व पॉलिसीज को मंजूरी दी गई। कैबिनेट द्वारा हरियाणा इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) नीति 2022 को मंजूरी दी गई है। वर्ष 2022 को हरियाणा में ‘इलेक्ट्रिक वाहनों का वर्ष’ घोषित किया जाएगा। ईवी नीति का उद्देश्य पर्यावरण को सरंक्षित करना, कार्बन फुटप्रिंट को कम करना, हरियाणा को ईवी मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना, ईवी क्षेत्र में कौशल विकास सुनिश्चित करना, ईवी वाहनों को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना, ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदान करना और ईवी तकनीक में अनुसंधान एवं विकास को प्रोत्साहित करना है।

20 वर्ष की अवधि के लिए विद्युत शुल्क में छूट

यह नीति ईवी प्रौद्योगिकी में नए विनिर्माण को प्रोत्साहित करती है और मौजूदा ऑटोमोबाइल निर्माताओं को ईवी विनिर्माण क्षेत्र में विविधता लाने के लिए प्रोत्साहित भी करती है। नीति में ईवी निर्माताओं को फिक्सड पूंजी निवेश (एफसीआई), कुल एसजीएसटी, स्टाम्प शुल्क पर प्रोत्साहन देकर विभिन्न वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करना, रोजगार सृजन इत्यादि शामिल हैं। इसके अनुसार 20 वर्ष की अवधि के लिए विद्युत शुल्क में छूट के साथ स्टाम्प शुल्क की शत-प्रतिशत प्रतिपूर्ति की जाएगी। 10 वर्षों की अवधि के लिए लागू कुल एसजीएसटी प्रतिपूर्ति 50 प्रतिशत होगी।

इलेक्ट्रिक व्हीकल, इलेक्ट्रिक व्हीकल के कंपोनेंट्स, ईवी बैटरी, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर आदि बनाने वाली कंपनियों को कैपिटल सब्सिडी के साथ इंसेंटिव दिया जाएगा। मेगा उद्योग को एफसीआई का 20 प्रतिशत या 20 करोड़ रुपये, जो भी कम हो, पर पूंजीगत सब्सिडी मिलेगी। बड़े उद्योग को 10 करोड़ रुपये तक एफसीआई की 10 प्रतिशत की सब्सिडी मिलेगी। मध्यम उद्योग के लिए 50 लाख रुपये तक एफसीआई का 20 प्रतिशत, लघु उद्योग के लिए 40 लाख रूपए तक एफसीआई का 20 प्रतिशत और सूक्ष्म उद्योग के लिए 15 लाख रूपए तक एफसीआई का 25 प्रतिशत है।

खरीदार पंजीकरण शुल्क में छूट के पात्र होंगे

इस नीति के तहत बैटरी डिस्पोजल यूनिट स्थापित करने वाली इकाइयों को 100 करोड़ रुपए तक एफसीआई की 15 प्रतिशत प्रतिपूर्ति मिलेगी। यह नीति मौजूदा सूक्ष्म, लघु, मध्यम और बड़ी इकाइयों/ विनिर्माताओं के लिए 2 करोड़ रुपए तक बुक वैल्यू के 25 प्रतिशत ईवी निर्माण में बदलने की एकमुश्त सुविधा प्रदान करती है। एक इलेक्ट्रिक वाहन की लागत पारंपरिक-ईंधन-आधारित वाहनों की तुलना में अधिक है जो ईवी पर जाने (स्विच) में खरीदारों के लिए एक प्रमुख बाधा है।

नीति खरीदारों को प्रोत्साहन प्रदान करती है जो प्रभावी अग्रिम लागत को कम करेगी और व्यक्तियों को परिवहन के लिए अपने प्राथमिक साधन के रूप में इलेक्ट्रिक वाहनों को लेने के लिए प्रेरित करेगी। यह नीति राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों या हाइब्रिड इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद पर 10 लाख रुपए तक का अर्ली बर्ड डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर प्रदान करेगी। खरीदार पंजीकरण शुल्क में छूट और मोटर वाहन कर में छूट के पात्र होंगे।

अनुसंधान एवं विकास को प्रोत्साहित करती है नीति

यह नीति शैक्षिक या अनुसंधान संस्थानों में अनुसंधान एवं विकास को प्रोत्साहित करती है। यह नीति नई इलेक्ट्रिक चार्जिंग तकनीक विकसित करने के लिए 1 करोड़ रुपए तक की परियोजना लागत का 50 प्रतिशत और नई इलेक्ट्रिक वाहन प्रौद्योगिकी विकसित करने के लिए 5 करोड़ रुपये तक ईवी के क्षेत्र में अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देगी। गैर-जीवाश्म-ईंधन आधारित गतिशीलता समाधान (मोबिलिटी सॉल्यूशन) पर समर्पित अनुसंधान करने वाले संस्थानों को 5 करोड़ रुपये का अनुदान प्रदान किया जाएगा। ईवी के अनुसंधान एवं विकास से संबंधित बुनियादी ढांचे की स्थापना के लिए पहले 20 कॉलेजों/आईटीआई/पॉलीटेक्निकों को 25 लाख रुपये की एकमुश्त सब्सिडी दी जाएगी।

गुरुग्राम और फरीदाबाद होंगे मॉडल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी शहर घोषित

सरकारी संगठनों/सार्वजनिक निकायों/निजी कंपनियों को उत्कृष्टता केंद्र (सीओई) स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, जिसे 5 करोड़ रुपये तक की परियोजना लागत के 50 प्रतिशत अनुदान के साथ प्रोत्साहित किया जाएगा। नीति में ईवी कंपनियों के साथ कार्यरत हरियाणा अधिवासी जनशक्ति के एवज में 10 वर्षों के लिए 48 हजार रूपए प्रति कर्मचारी प्रति वर्ष की रोजगार सृजन सब्सिडी का भी प्रावधान है। वर्ष 2030 तक हरियाणा राज्य परिवहन उपक्रमों के स्वामित्व वाले बस बेड़े को शत-प्रतिशत इलेक्ट्रिक बसों या ईंधन सैल वाहनों या अन्य गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित प्रौद्योगिकियों में बदलने का प्रयास किया जाएगा।

गुरुग्राम और फरीदाबाद शहरों को मॉडल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी (ईएम) शहरों के रूप में घोषित किया जाएगा, जिसमें शत-प्रतिशत इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी), ई-मोबिलिटी हासिल करने के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को अपनाने के लिए चरणबद्ध लक्ष्य होंगे। इसके अलावा, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग (टीसीपी) अनिवार्य रूप से ईवी वाहनों को आगे बढाने व समग्र पारिस्थितिकी तंत्र को सक्षम करने के लिए समूह आवासीय भवनों, वाणिज्यिक भवनों, संस्थागत भवनों, मॉल, मेट्रो स्टेशन इत्यादि स्थानों में इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्ज करने के प्रावधान शामिल करेगा।

डाटा सेंटर पॉलिसी को भी मंजूरी दी गई

बैठक में हरियाणा को डेटा सेंटर उद्योग के स्थल के रूप में विकसित करने और हरियाणा को वैश्विक डेटा सेंटर हब के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से हरियाणा राज्य डाटा सेंटर नीति, 2022 को स्वीकृति प्रदान की गई। हरियाणा का मजबूत आईटी ईको सिस्टम, अत्यधिक मांग आधार, बिजली की अच्छी उपलब्धता और उत्तर भारत में स्थानीय लाभ यहां डेटा सेंटर उद्योग के विकास के लिए सुविधाजनक हैं।इस नीति का उद्देश्य दुनिया के मुख्य उद्यमियों को उद्योग व व्यापार वातावरण प्रदान करके आकर्षित करना और हरियाणा में 115-120 नए डाटा सेंटर की स्थापना की सुविधा प्रदान करना है। इन डाटा सेंटरों के स्थापित होने से 7500 करोड़ रुपये के निवेश की संभावना है।

हरियाणा में स्थापित 01 मेगावाट और उससे अधिक बिजली की नई पॉलिसी के लाभ के रूप में ए और बी श्रेणी के ब्लॉकों में 10 वर्षों की अवधि के लिए कुल एसजीएसटी की 50 प्रतिशत की प्रतिपूर्ति और सी व डी श्रेणी के ब्लॉकों में 10 वर्षों की अवधि के लिए कुल एसजीएसटी की 75 प्रतिशत की प्रतिपूर्ति होगी। हरियाणा के डिस्कॉमस द्वारा बिजली खपत के बिजली बिल में 3 साल की अवधि के लिए कुल एसजीएसटी के 25 प्रतिशत की प्रतिपूर्ति होगी। डेटा सेंटर की स्थापना के लिए बिक्री/पट्टा विलेखों पर भुगतान किए गए स्टाम्प शुल्क की शत-प्रतिशत प्रतिपूर्ति होगी। इसके अलावा 20 साल की अवधि के लिए बिजली शुल्क से शत-प्रतिशत छूट की अनुमति होगी।

रोजगार सृजन सब्सिडी – 10 वर्षों की अवधि के लिए 48,000 रुपये प्रति वर्ष रोजगार सृजन हेतु डेटा सेंटर सब्सिडी के लिए पात्र होंगे। राज्य में संचालित डाटा केंद्रों के लिए संपत्ति कर औद्योगिक दरों के बराबर होगा। हरियाणा सरकार डेटा सेंटर से संबंधित बुनियादी ढांचे को हरियाणा बिल्डिंग कोड के तहत एक अलग इकाई के रूप में शामिल करेगी, जो एफएआर में छूट और बिल्डिंग डिजाइन तथा निर्माण मानदंड प्रदान करेगी। निर्माण के लिए ग्राउंड कवरेज की अनुमति प्लॉट क्षेत्र के 60 प्रतिशत की दर से दी जाएगी; एफएआर 5 तक होगा, खिड़कियों और पार्किंग क्षेत्र की आवश्यकता केवल वास्तविक जरूरतों के अनुसार होगी; बिजली जनरेटर/डीजी सेटों को जी+4 स्तरों तक स्थापित करने की अनुमति होगी; रूफ टॉप चिल्लर की अनुमति होगी और अतिरिक्त एक मीटर वाई फेसिंग के साथ 3.6 मीटर ऊंचाई की चारदीवारी की भी अनुमति होगी।

अडाणी पावर के साथ बिजली समझौते को मंजूरी

बैठक में अडाणी पावर लिमिटेड के साथ अनुपूरक विद्युत खरीद समझौते पर हस्ताक्षर करने की स्वीकृति प्रदान की गई। हरियाणा डिस्कॉम्स ने अडानी पावर लिमिटेड के साथ 712-712 मेगावाट बिजली की खरीद के लिए 7 अगस्त, 2008 को दो समझौते किए थे, जिसमें 25 वर्षों के लिए 2.94 रुपये प्रति यूनिट बिजली ली जानी थी। यह बिजली गुजरात राज्य के मुंद्रा विद्युत परियोजना की उत्पादन इकाइयों 7, 8 और 9 से कुल 1424 मेगावाट की अनुबंधित क्षमता में निहित नियमों और शर्तों के साथ मिलनी थी।

जिनमें यूनिट-7 दिनांक 7 अगस्त, 2012 को जबकि यूनिट 8 और 9 को 7 फरवरी, 2013 को संचालित किया गया था। अडानी पावर लिमिटेड ने सितंबर 2021 से इस आधार पर बिजली की आपूर्ति बंद कर दी थी कि आयातित कोयले की बढ़ी हुई दरों के कारण उच्च परिचालन लागत बढ़ गई है और उन्हें नुकसान हो रहा है। कम्पनी ने बिजली खरीद अनुबंध और संबंधित मुद्दों पर, विशेष रूप से आयातित कोयले की लागत को पूरा करने लिए फिर से बातचीत करने की मांग की।

इसके लिए उपलब्ध विभिन्न विकल्पों को ध्यान में रखते हुए और सबसे उचित कीमत पर बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए हरियाणा डिस्कॉम्स ने बातचीत की और विभिन्न बिंदुओं पर सहमति बनी। समझौते अनुसार 224 मेगावाट की आयातित कोयला आधारित क्षमता को छोडऩा और केवल घरेलू कोयले से उत्पादित होने वाली हरियाणा परिधि में 1200 मेगावाट की कुल क्षमता को बनाए रखना। शेष आयातित कोयला आधारित होगा, जिसे यदि निर्धारित किया जाता है तो उसका भुगतान आयातित कोयले की लागत और अन्य लागत संबंधित मुद्दों के साथ किया जाएगा। विभिन्न मंचों और अदालतों के समक्ष सभी लंबित मुकदमों को वापस लेना और निपटाना करना। मंत्रिपरिषद ने उपरोक्त प्रस्ताव को सैद्धांतिक रूप से स्वीकृति प्रदान कर दी और अडानी पावर लिमिटेड के साथ अनुपूरक विद्युत खरीद समझौते इस शर्त के साथ किया जाए और अडानी पावर लिमिटेड के अनुवर्ती बकाया भुगतान के लिए महाधिवक्ता, हरियाणा की सहमति ली जाए।

सिविल सेवा नियम में संशोधन को मंजूरी

उपरोक्त के अलावा बैठक में हरियाणा सिविल सेवा (अवकाश) नियम, 2016 में संशोधन को मंजूरी दी गई। अब एकल पुरुष सरकारी कर्मचारी को भी दो साल की बाल देखभाल छुट्टी की अनुमति होगी। यह नियम हरियाणा सिविल सेवा (अवकाश) प्रथम संशोधन नियम, 2022 कहे जाएंगे। संशोधन के अनुसार एकल पुरुष सरकारी कर्मचारी (अविवाहित, विधुर या तलाकशुदा) और महिला सरकारी कर्मचारी 18 वर्ष की आयु तक के अपने दो बड़े बच्चों की देखभाल लिए अपनी पूरी सेवा के दौरान अधिकतम दो साल (यानी 730 दिन) के लिए चाइल्ड केयर लीव का लाभ उठा सकते हैं। इसके अलावा, दिव्यांग बच्चों के मामले में आयु की कोई सीमा नहीं होगी। सक्षम चिकित्सा प्राधिकारी द्वारा जारी अशक्तता प्रमाण पत्र के अनुसार 40 प्रतिशत से अधिक अशक्तता और दिव्यांग बच्चा पूरी तरह से महिला या एकल पुरुष सरकारी कर्मचारी पर निर्भर है, को यह लाभ मिलेगा।

बेरी आश्रम का नियंत्रण सरकार ने लिया

बैठक में श्री माता भीमेश्वरी देवी मंदिर (आश्रम), बेरी, झज्जर का नियंत्रण सरकार ने अपने हाथ में लेने को मंजूरी दे दी। श्री माता भीमेश्वरी देवी मंदिर (आश्रम), बेरी पूजा स्थल और इससे संबंधित भूमियों और भवनों सहित उसके विन्यासों के बेहतर प्रबंधन और प्रशासन के लिए ‘हरियाणा श्री माता भीमेश्वरी देवी मंदिर बेरी अधिनियम 2022’ को मंजूरी प्रदान की गई। वर्तमान में श्री माता भीमेश्वरी देवी (आश्रम) बेरी का प्रबंधन एक महंत परिवार के हाथों में है। मूलभूत सुविधाओं की कमियों के कारण श्रद्वालुओं को हो रही कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए इस अधिनियम को कैबिनेट द्वारा अनुमोदित किया गया है।

अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने को मंजूरी दी

मुख्यमंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में आज यहां हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में हरियाणा राज्य में नगर पालिका क्षेत्र के बाहर बुनियादी ढांचे की कमी वाले क्षेत्रों में आवश्यक सेवाओं और नागरिक सुविधाओं के प्रावधान तथा अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने की नीति को मंजूरी दी गई।यह नीति नगर पालिका सीमा से बाहर के क्षेत्र में लागू होगी और इससे लगभग 2,000 अनधिकृत कॉलोनियों को लाभ होगा।इन कॉलोनियों में नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए हरियाणा ग्रामीण विकास प्राधिकरण नोडल एजेंसी होगा।

नीति की अधिसूचना से 6 महीने की अवधि के भीतर अनधिकृत कॉलोनियों के डेवलपर्स/आरडब्ल्यूएएस से आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे, जिसकी जांच उपायुक्त की अध्यक्षता वाली एक स्थानीय समिति द्वारा की जाएगी।बिल्ड अप एरिया के लिए 5 प्रतिशत और खुले क्षेत्रों के लिए 10 प्रतिशत की दर से विकास शुल्क प्राप्त करने के बाद कालोनियों को नियमित किया जाएगा और नागरिक सुविधाएं प्रदान की जाएंगी।जहां कॉलोनी 50 प्रतिशत से कम विकसित की गई है, उनमें सामुदायिक स्थलों, पार्कों, खुली जगहों और सार्वजनिक उपयोगिता का प्रावधान डेवलपर्स द्वारा किया जाना होगा। इस नीति से अनधिकृत कॉलोनियों के निवासियों के जीवन स्तर में सुधार लाने में मदद मिलेगी।

यूएचबीवीएनएल को 700 करोड़ देने को मंजूरी

केैबिनेट ने पूंजीगत व्यय और बिजली खरीद भुगतान को पूरा करने के लिए उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम लिमिटेड (यूएचबीवीएनएल) को स्वीकृत ऋण के खिलाफ सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, सेक्टर -10, पंचकूला के पक्ष में 700 करोड़ रुपये की गारंटी प्रदान करने के प्रस्ताव को कार्योत्तर स्वीकृति प्रदान की गई। निगम विभिन्न बैंकों द्वारा स्वीकृत निधि-आधारित और गैर-निधि-आधारित कार्यशील पूंजी सीमाओं का उपयोग करके अपने दिन-प्रतिदिन के कार्यों का प्रबंधन करता है। बिजली खरीद भुगतान में वृद्धि के कारण, पूंजीगत व्यय की आवश्यकता को पूरा करने के लिए और बिजली मंत्रालय के दिशानिर्देशों के अनुसार बिजली आपूर्तिकर्ताओं के पक्ष में साख पत्र प्रदान करने के कारण, यूएचबीवीएनएल को नए कार्यशील पूंजी ऋण और कैपेक्स ऋण की आवश्यकता है।

फंड-आधारित आवश्यकता को पूरा करने के लिए, यूएचबीवीएनएल ने विभिन्न बैंकों से 500 करोड़ रुपये के कैपेक्स ऋण तथा 200 करोड़ रूपये के कार्यशील पूंजी ऋण को मंजूरी देने का अनुरोध किया था। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, सेक्टर -10, पंचकुला ने निगम के अनुरोध पर विचार किया और 500 करोड़ रुपये का कैपेक्स ऋण स्वीकृत कर दिया। इस कार्यशील पूंजी ऋण के साथ, यूएचबीवीएनएल समय पर बिजली खरीद देनदारियों का निर्वहन करने में सक्षम होगा और कैपेक्स ऋण से बिना किसी वित्तीय कठिनाई के पूंजीगत व्यय वहन कर सकेगा। बैंक के स्वीकृति पत्र के अनुसार, यूएचबीवीएनएल को उनके उधार के लिए राज्य सरकार की गारंटी प्रदान करनी होगी। 31 मार्च, 2022 को लिया गया पूंजीगत ऋण 1988 करोड़ रुपये है।

लकड़ी आधारित उद्योग नियम संशोधित किया

हरियाणा सरकार ने हरियाणा लकड़ी आधारित उद्योग (स्थापना और विनियमन) नियम, 2022 के नियम -6 (2) में संशोधन किया है, जिसके तहत ‘‘तीन किलोमीटर’’ शब्द को ‘‘पांच सौ मीटर’’ से प्रतिस्थापित किया गया है, जैसा कि मूल प्रस्ताव में है।हरियाणा में वन क्षेत्र के 500 मीटर के बाहर व तीन किलोमीटर के भीतर स्थित मौजूदा लकड़ी आधारित उद्योगों को लाइसेंस या पंजीकरण की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए यह संशोधन किया गया है इससे लकड़ी आधारित उद्योगों के विकास के लिए अधिक अवसर मिलेंगे। बैठक में आज यहां हरियाणा लकड़ी आधारित उद्योग (स्थापना और विनियमन) नियम, 2022 के संशोधन के संबंध में एक प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इन नियमों को हरियाणा लकड़ी आधारित उद्योग (स्थापना और विनियमन) संशोधन नियम, 2022 कहा जा सकता है।

इसके अलावा कैबिनेट ने हरियाणा सरकार (आवंटन) नियम, 1974 के कार्य में योजना विभाग के विषय मामलों के प्रतिस्थापन और निदेशालय स्तर पर विभाग के नामकरण परिवर्तन के प्रस्ताव को मंजूरी दी। इन नियमों को हरियाणा सरकार (आवंटन) संशोधन नियम, 2022 कहा जाएगा। निदेशालय स्तर पर आर्थिक एवं सांख्यिकीय विश्लेषण विभाग, हरियाणा का नाम बदलकर आर्थिक एवं सांख्यिकीय मामले विभाग, हरियाणा कर दिया गया है।केंद्र स्तर पर सांख्यिकीय गतिविधियां राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ), सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा संचालित की जाती हैं।

आर्थिक और सांख्यिकीय विश्लेषण विभाग द्वारा राज्य स्तर पर, योजना और अर्थशास्त्र/सांख्यिकी गतिविधियों का संचालन किया जाता है। योजना विभाग के तहत स्वर्ण जयंती हरियाणा वित्तीय प्रबंधन संस्थान नाम से एक संस्थान भी स्थापित किया गया है। राज्य में ‘‘चिट फंड्स अधिनियम, 1982’’ और ‘‘हरियाणा चिटफंड नियम, 2018’’ के कार्यान्वयन का कार्य भी इस विभाग को सौंपा गया है। तद्नुसार विभाग के शासनादेश में महत्वपूर्ण परिवर्तन को देखते हुए उक्त प्रस्तावों को मंत्रिपरिषद ने स्वीकृति प्रदान की है।

अब सरकार घर जाकर ही पेंशन बनाएगी

बैठक में वरिष्ठ नागरिकों को बड़ी राहत प्रदान करते हुए वृद्धावस्था सम्मान भत्ता योजना की प्रक्रिया में बदलाव करने का निर्णय लिया है। अब वृद्धावस्था सम्मान भत्ता के लिए नागरिक सेवा केन्द्र (सीएसई),अंत्योदय केंद्र या किसी अन्य सरकारी कार्यालय में बार-बार चक्कर नहीं काटने पडेेंग़े। नई प्रक्रिया के तहत, वृद्धावस्था सम्मान भत्ता योजना के तहत पात्र व्यक्ति को अपनी पात्रता निर्धारित करने के लिए परिवार पहचान संख्या की आवश्यकता होगी।हरियाणा परिवार पहचान प्राधिकरण वृद्धावस्था सम्मान भत्ते के लिए पात्र व्यक्तियों का इलेक्ट्रॉनिक रूप में डेटा उपलब्ध करवाएगा और विभाग की योजना के तहत हरियाणा परिवार पहचान प्राधिकरण डेटा ट्रांसफर प्रक्रिया के माध्यम से पूरे विवरण के साथ एक सूची तैयार करेगा।

सूची में ऐसे व्यक्तियों को शामिल किया जाएगा जिनकी आयु 60 वर्ष या उससे अधिक हो और पति या पत्नी की आय एक साथ प्रति वर्ष 2 लाख रुपये से अधिक न हो और जो कम से कम पिछले 15 वर्षों से हरियाणा का निवासी हो। हरियाणा परिवार पहचान प्राधिकरण द्वारा व्यक्ति की आयु, उसकी आय की स्थिति, निवास प्रमाण और बैंक खाते के विवरण की जानकारी के बाद हरियाणा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग को और किसी प्रकार के सत्यापन की आवश्यकता नहीं होगी। यदि विभाग के संज्ञान में सूचना/सत्यापन की सत्यता के संबंध कोई विशिष्ट तथ्य आता है तो उसे सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा आगे की जांच के लिए हरियाणा परिवार पहचान प्राधिकरण को अग्रेषित किया जाएगा।

योजना के तहत व्यक्तियों की पात्रता निर्धारित करने के बाद वृद्धावस्था सम्मान भत्ता प्राप्त करने के लिए उनकी सहमति प्राप्त करने हेतु संबंधित जिला समाज कल्याण अधिकारी (डीएसडब्ल्यूओ) के कार्यालय या किसी अन्य अधिकृत सरकारी प्रतिनिधि द्वारा इच्छित लाभार्थियों से संपर्क करेगा। जिला समाज कल्याण अधिकारी यह सुनिश्चित करेगा कि व्यक्ति योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार कोई अन्य पेंशन नहीं ले रहा है। अपेक्षित लाभार्थियों की सहमति एवं पूछताछ करने उपरांत जैसा कि ऊपर उल्लेख किया गया है, संबंधित जिला समाज कल्याण अधिकारी सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के पोर्टल पर लाभार्थियों के पक्ष में वृद्धावस्था सम्मान भत्ता की ऑनलाइन स्वीकृति प्रदान करेगा और विशिष्ट पेंशन पहचान संख्या अंकित की जाएगी।

इस प्रकार, वरिष्ठ नागरिकों को सीएसई/अंत्योदय केंद्र या किसी भी सरकारी कार्यालय में जाने की आवश्यकता नहीं होगी और वृद्धावस्था सम्मान भत्ते के पात्र वरिष्ठ नागरिकों को बिना किसी असुविधा के उनके घर द्वार पर ही पात्रता की स्वीकृति मिल जाएगी। यह नई प्रक्रिया 31 मार्च, 2022 को पायलट आधार पर शुरू की गई है और परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) पोर्टल के माध्यम से वृद्धावस्था सम्मान भत्ता के लिए आवेदन करने की पुरानी प्रक्रिया को 25 अप्रैल, 2022 से रोक दिया गया था।

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