जिद्दी स्वभाव, सफलता की ऊंचाई और टाटा से लड़ाई, जाने सायरस मिस्त्री के बारे में सबकुछ

साइरस मिस्त्री टाटा संस के छठे और सबसे युवा चेयरमैन थे, वह टाटा संस के पहले ऐसे चेयरमैन थे जिनके सरनेम में टाटा नाम नहीं जुड़ा था.

इंडिया न्यूज़ (दिल्ली, All About cyrus mistry life): टाटा संस के पूर्व चेयरमैन रहे साइसर मिस्त्री का रविवार को महाराष्ट्र के पालघर में एक सड़क दुर्घटना में निधन हो गया। वह अहमदाबाद से मुंबई जा रहे थे। साइरस मिस्त्री टाटा संस के छठे और सबसे युवा चेयरमैन थे। वह टाटा संस के पहले ऐसे चेयरमैन थे जिनके सरनेम में टाटा नाम नहीं जुड़ा था। साइरस मिस्त्री ने 2012 में रतन टाटा के पद छोड़ने के बाद टाटा संस की कमान संभाली थी।  इसके बाद वे 2016 तक ग्रुप के चेयरमैन बने रहे थे हालांकि, बाद में उन्हें पद से हटा दिया गया था।  इसके बाद टाटा समूह और साइरस मिस्त्री के बीच लंबा कानूनी विवाद चला, हालांकि इस क़ानूनी लड़ाई में मिस्त्री हार गए थे, लेकिन हार मानना सायरस मिस्त्री के स्वभाव में नही था.

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साइसर मिस्त्री का परिवार.

आइए जानते है सायरस मिस्त्री के परिवार से लेकर उनकी टाटा से लड़ाई तक उनके बारे में –

1.मुंबई में जन्म

मिस्त्री का जन्म भारतीय मूल के चर्चित उद्योगपति पलोनजी शापूरजी मिस्‍त्री परिवार में मुंबई में 4 जुलाई 1968 को हुआ था।  वह परिवार के सबसे छोटे बेटे थे। सायरस आयरलैंड के नागरिक थे। क्योंकि उनकी मां आयरिश थीं, लेकिन बचपन से ही वो भारत में पले बढ़े और बाद में इंग्लैंड से डिग्री लेने के बावजूद वो दिल से एक भारतीय ही थे। साल 1992 में साइरस मिस्त्री ने भारत के सबसे प्रमुख वकीलों में से एक इकबाल छागला की बेटी रोहिका छागला से शादी की। उनके दो बेटे हैं। सायरस मिस्त्री कंस्ट्रक्शन फेडरेशन ऑफ इंडिया के संस्थापक सदस्य भी हैं। उनकी नेट वर्थ 70,000 करोड़ रुपये से ज्यादा है.

2. लंदन से पढ़ाई

सायरस मिस्त्री कि स्कूल की पढ़ाई मुंबई के कैथेड्रल एंड जॉन कॉनन से की. इसके बाद सिविल इंजिनियरिंग की पढ़ाई लंदन से की और फिर लंदन बिजनेस स्कूल से मैनेजमेंट में मास्टर डिग्री हासिल की.

3. 26 साल की उम्र में एमडी बने

मिस्त्री ने 1991 में पिता के कारोबार में हाथ बांटना शुरू कर दिया। 1994 में ग्रुप कंपनियों में डायरेक्टर बने। तब वह सिर्फ 26 साल के थे। अपने पिता की तरह ही साइरस मिस्‍त्री ने भारत में कई बड़े रिकॉर्ड बनाए, इनमें सबसे ऊंचे रिहायसी टॉवर का निर्माण, सबसे लंबे रेल पुल का निर्माण और सबसे बड़े बंदरगाह का निर्माण शामिल है। पलोनजी मिस्‍त्री ग्रुप का कारोबार कपड़े से लेकर रियल एस्टेट, हॉस्पिटेलिटी और बिजनेस ऑटोमेशन तक फैला हुआ है।  कंपनी में कुल मिलाकर 23 हज़ार से ज्यादा लोग काम कर रहे है.

4. अफ्रीका तक फैलाया कारोबार

साइरस ने शापूरजी पालोनजी एंड कंपनी का कारोबार दुनिया के 50 देशों में फैला दिया।  उन्होंने कंस्ट्रक्शन, इंफ्रास्ट्रक्चर और रियल एस्टेट में ग्रुप की कंपनियों को दुनिया भर में स्थापित किया।  उन्होंने कंपनी के कारोबार को मध्य पूर्व और अफ्रीका के देशों तक विस्तार दिया.

5. टाटा संस के सबसे काम उम्र के चेयरमैन

2006 में उनके पिता पालोनजी मिस्त्री ने टाटा समूह के बोर्ड से रिटायर होने के बाद अपने बेटे को बोर्ड में नियु्क्त किया। आज भी टाटा संस में शापूरजी पालोनजी ग्रुप सबसे बड़ा (18.37 फीसदी का) शेयरहोल्डर है. उन्हें टाटा ग्रुप का चेयरमैन बनवाने और फिर उस पद से हटवाने में रतन टाटा की अहम भूमिका थी। मिस्त्री इस पद पर पहुंचनेवाले सबसे कम उम्र के शख्स थे। उनके बाद एन. चंद्रशेखरन टाटा ग्रुप के चेयरमैन बने।  वे टाटा ग्रुप के पहले गैर-पारसी चेयरमैन है.

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रतन टाटा के साथ साइसर मिस्त्री.

टाटा संस में डायरेक्टर बनने के बाद भारत में आम लोग मिस्त्री को जानने और पहचानने लगे थे। भारत में ज्यादातर लोग टाटा सन्स के पूर्व चेयरमैन के तौर पर ही उन्हें जानते हैं। साइरस मिस्त्री को टाटा संस की कई कंपनियों का डायरेक्टर चुना गया. नवंबर 2011 में वो टाटा संस के वाइस चेयरमैन बने और रतन टाटा के रिटायर होने के बाद 28 दिसंबर 2012 को उनको टाटा संस का चेयरमैन बना दिया गया.

6. रतन टाटा और मिस्त्री के बीच क्या था विवाद

टाटा का आरोप था कि सायरस मिस्त्री टाटा ग्रुप को गलत दिशा में ले जाने की कोशिश कर रहे थे, हालांकि भारत में बिज़नेस की दुनिया के जानकार कहते हैं कि साइरस मिस्त्री के टाटा सन्स के बोर्ड में 2006 में शामिल होने के बाद से ही रतन टाटा के साथ विवाद शुरू हो गया था।  विवाद के मूल में कारण यह था कि साइरस मिस्त्री का मानना था की टाटा सन्स अपने लाभ का जो हिस्सा परोपकारी कार्यों में लगाता है, उस पर लगाम लगाए।  रतन टाटा इस राय को नहीं मानते थे। टाटा का मानना था कि टाटा ग्रुप अपने मूल उद्देश्यों से भटक नहीं सकता।  वह राष्ट्र निर्माण में अपनी अहम भूमिका निभाता रहेगा।  इस मसले पर मिस्त्री और रतन टाटा के रास्ते अलग-अलग थे.

7. हाईकोर्ट में जीते फिर सुप्रीम कोर्ट में केस हारे

2016 में टाटा संस के बोर्ड ने मिस्त्री को अचानक पद से हटा दिया।  इसके खिलाफ मिस्त्री ने रतन टाटा और टाटा संस के खिलाफ हाईकोर्ट में मुकदमा कर दिया। वहां पर मिस्त्री को जीत मिली लेकिन उसके बाद टाटा संस ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और कोर्ट ने टाटा के पक्ष में अपना फैसला दिया। इस लड़ाई को हारने के बाद मिस्त्री को बड़ा झटका लगा और वो सुर्खियों से दूर काफी लो प्रोफाइल ज़िन्दगी में रहने लगे.

8. जिद्दी और साफ़ बात करने वाला व्यक्तित्व

सायरस मिस्त्री काफी जिद्दी स्वभाव के थे। वह रतन टाटा के सामने झुकने को तैयार नहीं थे। उन्होंने कभी यह नही लगा कि टाटा संस में सर्वाधिक शेयरहोल्डिंग तो उनके परिवार की है, इसलिये उनकी राय को तरजीह और तवज्जो मिलनी चाहिए, पर रतन टाटा के कद के सामने वे अपनी राय को मनवाने में सफल नहीं हुए.

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साइसर मिस्त्री पत्नी और बच्चों के साथ.

सायरस एक मृदुभाषी लेकिन साफ बात कहने वाले इंसान माने जाते थे। अब भी मिस्त्री परिवार और रतन टाटा के लोगों के बीच जो तनाव चल रहा है उसका कितना असर सायरस पर पड़ा होगा इसकी कल्पना करना आसान नहीं है. उनके टाटा के साथ विवाद के चक्कर ज्यादातार लोग यह जान भी नहीं पाए कि उन्होंने पारिवारिक कारोबार शापुरजी पल्लोनजी समूह को एक नई ऊंचाई पर पहुंचाने में क्या-क्या भूमिका निभाई.

9. नेतृत्व करने वाले व्यक्ति

अगर रतन टाटा से उनके विवाद को छोड़ दिया जाए तो उद्योग जगत में मिस्त्री को जानने वाले जानते है कि साइरस मिस्त्री में नेतृत्व के पर्याप्त गुण थे। उनके निदेशक रहते शापूरजी पालोनजी मिस्त्री ग्रुप इंफ्रास्ट्रक्टर क्षेत्र ने अनेक बड़े प्रोजेक्ट देश और देश से बाहर पूरे किये है। दिल्ली में प्रगति मैदान को भी उन्हीं की कंपनी ने विकसित किया है।  सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की वजह से उन्हें अपने बिजनेस को गति देने में काफी लाभ मिलता था.

10. सादगी थी पहचान

अरबों की चल-चल संपत्ति होने पर भी साइरस मिस्त्री की लाइफ स्टाइल काफी सादगी से भरी थी।  वे अपने घर के निर्माण में अरबों रुपये खर्च नहीं करते थे।  वे अपने काम से मतलब रखने वाले व्यक्ति थे और बेवजह किसी के बीच में हस्तक्षेप नहीं करते थे। वे बाकी उद्योगपतियों की तरह उद्योगपतियों के संगठन सीआईआई या फिक्की से भी सक्रिय रूप से नहीं जुड़े थे।  उनका किसी सियासी दल से भी कभी सीधा या अप्रत्यक्ष रूप से नाम जुड़ा हुआ नही मिलता.

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साइसर मिस्त्री प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ.

यह बहुत कम लोग जानते हैं कि साइरस मिस्त्री के दादा ने ही मुगले आजम जैसी बड़ी पिक्चर फिल्म को प्रोड्यूस किया था। उन्होंने उसके निर्माण में पैसा पानी की तरफ बहाया था, पर ना तो साइरस ने और ना ही उनके पिता ने फिल्म निर्माण में दिलचस्पी दिखाई.

11. पिता जी का भी इसी साल हुआ था देहांत

साल 2022 पालोनजी परिवार के लिए बेहद खराब साबित हुआ है। इसी साल जून महीने में सायरस मिस्त्री के पिता और भारत के दिग्गज बिजनेस टायकून पालोनजी मिस्त्री (Pallonji Mistry) का निधन हो गया था। उन्होंने 93 साल की उम्र में मुंबई में आखिरी सांस ली थी.

कंस्ट्रक्शन सेक्टर की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक शापोरजी पलोनजी ग्रुप (Shapoorji Pallonji Group) के चेयरमैन रहे पालोनजी को भारत का सबसे गुमनाम अरबपति भी कहा जाता था। इसके कुछ ही महीने बाद अब साइरस मिस्त्री के निधन से परिवार को गहरी चोट लगी है.

अब उनके परिवार में उनकी मां पाट्सी पेरिन डुबास (Patsy Perin Dubash), शापूर मिस्त्री (Shapoor Mistry) के अलावा दो बहनें लैला मिस्त्री (Laila Mistry) और अलू मिस्त्री (Allu Mistry) हैं।  शापूर मिस्त्री साइरस के बड़े भाई है। साइरस की एक बहन की शादी रतन टाटा (Ratan Tata) के सौतेले भाई नोएल टाटा से हुई है। साइरस मिस्त्री की पत्नी रोहिका हैं और उनके दो बेटे फिरोज मिस्त्री और जहान मिस्त्री है.

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