गणेश चतुर्थी पर श्रीगणपति के जन्म से जुड़ी ये कथा पढ़ें

इंडिया न्यूज, नई दिल्ली :
Ganesh Chaturthi 2021 : गणेश चतुर्थी में कम वक्त रह गया है। बप्पा 10 सितंबर को भक्तों के घरों में विराजेंगे। गणेश चतुर्थी के पावन पर्व की तैयारियां शुरू हो गयीं हैं। लोग बप्पा को धूमधाम से घर लाने के लिए तैयारियों में लगे हुए हैं। घरों में साफ सफाई, सजावट हो रही है। सभी बडी धूमधाम से बप्पा का स्वागत करते हैं क्योंकि वो घर आते ही हर संकट हर लेते हैं।

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विघ्नों को हरने वाले गणपति को शिव और पार्वती जी का पुत्र माना जाता है, पर वे वेदों में उल्लिखित अनादि-अनंत देवता हैं। वेदों में उनकी वंदना ह्यनमो गणेभ्यो गणपति के उच्चारण से की गई है। किंतु पौराणिक मान्यताओं में गणेश जी के जन्म को लेकर कई कथाएं हैं। शिव पुराण में कथा है कि गणेश जी का जन्म पार्वती जी के उबटन से हुआ था और फिर शिव जी से उनके अनजाने में हुए युद्ध के कारण उनका शीष गज का हुआ। गणेश जी को लेकर यह लोक में सबसे प्रचलित कथा है। वहीं स्कंद पुराण गणेश जी के जन्म को राजस्थान स्थित पर्वत से जोड़ता है। इसके स्कंद अर्बुद खंड में कथा है कि माता पार्वती को शिव जी से मिले पुत्र प्राप्ति के वरदान के बाद अर्बुद पर्वत, जो अब का माउंट आबू है, पर गणेश अवतरण हुआ।

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वहीं गणेश चालीसा में गणेश जी के जन्म और उनके वर्तमान स्वरूप को लेकर एक अन्य कथा मिलती है। इसके अनुसार, जब माता पार्वती को वरदान के अनुसार अत्यंत बुद्धिमान व तेजस्वी बालक प्राप्त हुआ, तो उसे देखने सभी देव आए। शनि महाराज भी पहुंचे, किंतु वे बालक को अपनी दृष्टि से बचाने के लिए देखने नहीं जा रहे थे। पर, माता पार्वती के आग्रह पर उन्होंने जब उसे प्यार से नजर भर कर देखा, उस बालक का शीष आकाश में चला गया। हाहाकार मचने पर विष्णु के वाहन गरुड़ हाथी का सिर लेकर पहुंचे और बालक को लगाया गया और शिव जी ने उसमें फिर से प्राण फूंके। ये गणेश जी के उद्भव की रोचक लोक मान्यता की कथाएं हैं, किंतु वे आरंभ-अंत से परे देवता हैं, तभी तो तुलसीदास जी ने भी इसमें संशय ना करने को कहा है।

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