रुपया 55 पैसे कमजोर, आज फिर बनाया रिकार्ड निचला स्तर

इंडिया न्यूज, Rupee Weakens : रुपया आज भी डॉलर के मुकाबले 55 पैसे कमजोर हुआ है। विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया अपने सबसे निचले स्तर 81.54 के लेवल पर खुला। यह रुपए का अब तक का सबसे न्यूनतम स्तर है। अमेरिका में फेड ने ब्याज दरों में बढ़ातरी की है जिस कारण यूएस बॉन्ड यील्ड्स और डॉलर मजबूत हो रहा है। इसी का असर रुपये पर पड़ रहा है।

बता दें कि 2 वर्षीय यूएस ट्रेजरी यील्ड 4.2% मजबूत हो गया है। यह 12 अक्टूबर 2007 के बाद से इसका उच्चतम स्तर है। डॉलर इंडेक्स रातों-रात 114-अंक से बढ़कर दो दशक के उच्च स्तर पर पहुंच गया। इन दो प्रमुख कारणों से डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार कमजोर हो रहा है।

शेयर बाजार में भारी गिरावट

गौरतलब है कि आज शेयर बाजार में भी भारी गिरावट आई है। सेंसेक्स 930 अंकों की गिरावट के साथ 57150 पर और निफ्टी 310 अंकों की फिसलन के साथ 17010 पर कारोबार कर रहा है। सेंसेक्स के आज 30 में से 27 शेयर लाल निशान में कारोबार कर रहे हैं।

आखिरी पिछले 5 दिनों में कैसा रहा रुपये का क्लोजिंग लेवल

आखिरी कारोबारी सेशन शुक्रवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 13 पैसे की कमजोरी के साथ 80.99 रुपये के स्तर पर बंद हुआ था। इससे पहले वीरवार को भी डॉलर के मुकाबले रुपया 89 पैसे की कमजोरी के साथ 80.89 रुपये के स्तर पर बंद हुआ था।

Dollar

इससे पहले बुधवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 22 पैसे की कमजोरी के साथ 79.97 रुपये के स्तर पर बंद हुआ था। वहीं मंगलवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 2 पैसे की मजबूती के साथ 79.75 रुपये के स्तर पर बंद हुआ। इससे पहले सोमवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 3 पैसे की कमजोरी के साथ 79.77 रुपये के स्तर पर बंद हुआ था।

गिरते रुपए को संभालने के लिए आरबीआई उठाता है ये कदम

डॉलर के मुकाबले जब रुपए की कीमत काफी गिरने लगती है तो रिजर्व बैंक आफ इंडिया इसे संभालने के लिए कई ठोस कदम उठाता है। कई ऐसी नीतियों में बदलाव करता है जिससे डॉलर की मांग को कम किया जा सके। आरबीआई अपने मुद्रा कोष से कुछ डॉलर को निकालकर बेच सकता है।

आयात को मुश्किल करने के लिए नियमों को सख्त किया जा सकता है, जिससे डॉलर की मांग कम होती है। इससे विदेशी सामानों के दाम बढ़ जाते हैं। भारतीय सामानों को विदेशी ग्राहक अधिक खरीदें इसके लिए कुछ बदलाव किए जा सकते हैं, जिससे डॉलर का भंडार बढ़े। ऐसे ही कई और फैसले रिजर्व बैंक डॉलर की मांग को देश में कम करने के लिए उठा सकता है।

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