फिर बढ़ा डॉलर का भाव, रुपया 23 पैसे हुआ कमजोर

इंडिया न्यूज, नई दिल्ली (Dollar Vs Rupees): कई दिन से मजबूत हो रहा रुपया आज बुरी तरह से टूट गया। विदेशी मुद्रा बाजार में आज 4 अगस्त को डॉलर के मुकाबले रुपया 23 पैसे की कमजोरी के साथ 79.38 रुपये के स्तर पर खुला। इससे पहले बुधवार सुबह रुपया खुला तो मजबूती के साथ था लेकिन दोपहर बाद डॉलर की मांग में तेजी आ गई थी। इसके बाद रुपया रुपया 45 पैसे की कमजोरी के साथ 79.16 रुपये के स्तर पर बंद हुआ था। डॉलर में कारोबार काफी समझदारी से करने की जरूरत होती है, नहीं तो निवेश पर असर पड़ सकता है।

गौरतलब है कि आज शेयर बाजार में भी गिरावट दर्ज की गई है। शेयर बाजार आज खुला तो हरे निशान में था। लेकिन बाजार में ये बढ़त ज्यादा देर न रह सकी। सेंसेक्स 200 अंक गिरकर 58150 पर और निफ्टी 50 अंकों की गिरावट के साथ 17335 पर कारोबार कर रहा है।

आखिरी पिछले 5 दिनों के रुपये का क्लोजिंग स्तर

गौरतलब है कि बीते दिन बुधवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 45 पैसे की कमजोरी के साथ 79.16 रुपये के स्तर पर बंद हुआ था। इससे पहले मंगलवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 31 पैसे की मजबूती के साथ 78.71 रुपये के स्तर पर बंद हुआ था। इससे पहले सोमवार को भी डॉलर के मुकाबले रुपया में 23 पैसे की मजबूती आई थी और यह 79.02 रुपये के स्तर पर बंद हुआ।

शुक्रवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 50 पैसे की मजबूती के साथ 79.25 रुपये के स्तर पर बंद हुआ। वीरवार को रुपया 15 पैसे की मजबूती के साथ 79.75 रुपये के स्तर पर बंद हुआ जबकि पिछले बुधवार को डॉलर के मुकाबले रुपया में 12 पैसे की कमजोरी आई थी और यह 79.90 रुपये के स्तर पर बंद हुआ था।

कैसे तय होते हैं रुपय के दाम

रुपय के दाम किसी व्यक्ति विशेष के हाथ में नहीं होता है। यह लोगों की मांग पर निर्भर करत है। इस पर बाजार के उतार-चढ़ाव, देश का विदेशी मुद्रा भंडार, देश की अर्थव्यवस्था का असर होता है। यानि कि रुपए की कीमत इसकी खरीद-फरोख्त पर निर्भर करती है। रुपए की मांग जितनी ज्यादा होती है, इसके दाम डॉलर की तुलना में रुपए की कीमत उतने ही अधिक होंगे लेकिन यदि रुपए की मांग कम होगी तो डॉलर की तुलना में इसकी कीमत कम हो जाएगी।

गिरते रुपए को संभालने के लिए आरबीआई उठाता है ये कदम

डॉलर के मुकाबले जब रुपए की कीमत काफी गिरने लगती है तो रिजर्व बैंक आफ इंडिया इसे संभालने के लिए कई ठोस कदम उठाता है। कई ऐसी नीतियों में बदलाव करता है जिससे डॉलर की मांग को कम किया जा सके। आरबीआई अपने मुद्रा कोष से कुछ डॉलर को निकालकर बेच सकता है।

आयात को मुश्किल करने के लिए नियमों को सख्त किया जा सकता है, जिससे डॉलर की मांग कम होती है। इससे विदेशी सामानों के दाम बढ़ जाते हैं। भारतीय सामानों को विदेशी ग्राहक अधिक खरीदें इसके लिए कुछ बदलाव किए जा सकते हैं, जिससे डॉलर का भंडार बढ़े। ऐसे ही कई और फैसले रिजर्व बैंक डॉलर की मांग को देश में कम करने के लिए उठा सकता है।

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